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हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 150 में से

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पृष्ठ 88

हिन्द स्वराज
माना। उन्होंने देखा कि राजाओं और उनकी तलवार के बनिस्बत नीति का
बल ज्यादा बलवान है। इसलिए उन्होंने राजाओं को नीतिवान पुरुषों, ऋषियों
और फ़कीरों से कम दर्जे का माना। ऐसा जिस राष्ट्र का गठन है वह राष्ट्र
दूसरों को सिखाने लायक है, वह दूसरों से सीखने लायक नहीं है।
इस राष्ट्र में अदालतें थीं, वकील थे, डॉक्टर-वैद्य थे। लेकिन वे सब
ठीक ढंग से नियम के मुताबिक चलते थे। सब
जानते थे कि ये धन्धे बड़े नहीं हैं और वकील,
डॉक्टर वगैरह लोगों में लूट नहीं चलाते थे, वे
तो लोगों पर आश्रित थे। वे लोगों के मालिक
बनकर नहीं रहते थे। इन्साफ काफी अच्छा
होता था। अदालतों में न जाना, यह लोगों का
ध्येय था। उन्हें भरमाने वाले स्वार्थी लोग नहीं
थे। इतनी सड़न भी सिर्फ राजा और राजधानी
के आस-पास ही थी। यों आम प्रजा तो उससे
स्वतंत्र रहकर अपने खेत का मालिकी हक
भोगती थी। उसके पास सच्चा स्वराज्य था।
और जहां यह चांडाल सभ्यता नहीं पहुंची
है, वहां हिन्दुस्तान आज भी वैसा ही है।
उसके सामने आप अपने नये ढोंगों की बात
करेंगे, तो वह आपकी हंसी उड़ायेगा। उस पर
न तो अंग्रेज राज करते हैं, न आप कर सकेंगे।
उन्होंने सोचा कि बड़े शहर
खड़े करना बेकार की झंझट
है। उनमें लोग सुखी नहीं
होंगे। उनमें धूर्तों की टोलियां
और वेश्याओं की गलियां
पैदा होंगी, गरीब अमीरों से
लूटे जायेंगे। इसलिए उन्होंने
राजाओं को नीतिवान
पुरुषों, ऋषियों और फ़कीरों
से कम दर्जे का माना। ऐसा
जिस राष्ट्र का गठन हो वह
राष्ट्र दूसरों को सिखाने
लायक है, वह दूसरों से
सीखने लायक नहीं है।
जिन लोगों के नाम पर हम बात करते हैं, उन्हें हम पहचानते नहीं हैं, न
वे हमें पहचानते हैं। आपको और दूसरों को, जिनमें देशप्रेम है, मेरी सलाह
है कि आप देश में, जहां रेल की बाढ़ नहीं फैली है उस भाग में छह माह
के लिए घूम आयें और बाद में देश की लगन लगायें, बाद में स्वराज्य की
बात करें।
अब आपने देखा कि सच्ची सभ्यता मैं किस चीज को कहता हूं। ऊपर मैंने
जो तस्वीर खींची है वैसा हिन्दुस्तान जहां हो वहां जो आदमी फेरफार करेगा
उसे आप दुश्मन समझिए। वह मनुष्य पापी है।
पाठक : आपने जैसा बताया वैसा ही हिन्दुस्तान होता तब तो ठीक था।
लेकिन जिस देश में हजारों बाल-विधवायें हैं, जिस देश में दो बरस की
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