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हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 150 में से

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पृष्ठ 80

हिन्द स्वराज्य
हिन्दुस्तान की दशा-पांच
पाठक : वकीलों की बात तो हम समझ सकते हैं। उन्होंने जो अच्छा काम
किया है वह जान-बूझकर नहीं किया, ऐसा यकीन होता है। बाकी उनके धंधे
को देखा जाये तो वह कनिष्ठ ही है, लेकिन आप तो डॉक्टरों को भी उनके
साथ घसीटते हैं। यह कैसे ?
संपादक : मैं जो विचार आपके सामने रखता
हूँ, वे इस समय तो मेरे अपने ही हैं, लेकिन
ऐसे विचार मैंने ही किये हैं सो बात नहीं।
पश्चिम के सुधारक खुद मुझसे ज्यादा सख्त
शब्दों में इन धंधों के बारे में लिख गये हैं।
उन्होंने वकीलों और डॉक्टरों की बहुत निंदा
की है।
उनमें से एक लेखक ने एक जहरी पेड़ का
चित्र खींचा है, वकील-डॉक्टर वगैरह निकम्मे
धंधे वालों को उसकी शाखाओं के रूप में
बताया है और उस पेड़ के तने पर नीति-धर्म
की कुल्हाड़ी उठाई है। अनीति को इन सब
धंधों की जड़ बताया है। इससे आप यह
समझ लेंगे कि मैं आपके सामने अपने दिमाग
से निकाले हुए नये विचार नहीं रखता, लेकिन
दूसरों का और अपना अनुभव आपके सामने रखता हूँ।
डॉक्टरों के बारे में जैसे आपको अभी मोह है वैसे कभी मुझे भी था। एक
समय ऐसा था जब मैंने खुद डॉक्टर होने का इरादा किया था और सोचा था
कि डॉक्टर बनकर क़ौम की सेवा करूँगा। मेरा यह मोह अब मिट गया है।
हमारे समाज में वैद्य का धंधा कभी अच्छा माना ही नहीं गया, इसका भान
अब मुझे हुआ है और उस विचार की क़ीमत मैं समझ सकता हूँ।
अंग्रेजों ने डॉक्टरी विद्या से भी हम पर काबू जमाया है। डॉक्टरों में दंभ
की भी कमी नहीं है। मुगल बादशाह को भरमाने वाला एक अंग्रेज डॉक्टर
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[साइडबार / उद्धरण बॉक्स]:
पश्चिम के सुधारक खुद
मुझसे ज्यादा सख्त शब्दों में
इन धंधों के बारे में लिख गये
हैं। उन्होंने वकीलों और
डॉक्टरों की बहुत निंदा की है।
उनमें से एक लेखक ने
एक जहरी पेड़ का चित्र
खींचा है, वकील-डॉक्टर
वगैरह निकम्मे धंधे वालों को
उसकी शाखाओं के रूप में
बताया है और उस पेड़ के तने
पर नीति-धर्म की कुल्हाड़ी
उठाई है। अनीति को इन सब
धंधों की जड़ बताया है।