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हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 150 में से

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पृष्ठ 139

हिन्द स्वराज
पाठक : ट्रॉमगाड़ी और बिजली की बत्ती का क्या होगा ?
संपादक : यह सवाल आपने बहुत देर से किया। इस सवाल में अब कोई
जान नहीं रही। रेल ने अगर हमारा नाश किया है, तो क्या ट्रॉम नहीं करती ?
यंत्र तो साँप का ऐसा बिल है, जिसमें एक नहीं बल्कि सैकड़ों साँप होते हैं।
एक के पीछे दूसरा लगा ही रहता है। जहाँ यंत्र होंगे वहाँ बड़े शहर होंगे। जहाँ
बड़े शहर होंगे वहाँ ट्रॉमगाड़ी और रेलगाड़ी होगी, वहीं बिजली की बत्ती
की ज़रूरत रहती है। आप जानते होंगे कि विलायत में भी देहातों में बिजली
की बत्ती या ट्रॉम नहीं है। प्रामाणिक वैद्य और डॉक्टर आपको बताएँगे कि
जहाँ रेलगाड़ी, ट्रॉमगाड़ी वगैरह साधन बढ़े हैं, वहाँ लोगों की तन्दुरुस्ती गिरी
हुई होती है। मुझे याद है कि यूरोप के एक शहर में जब पैसे की तंगी हो गई
थी तब ट्रॉमों, वकीलों और डॉक्टरों की आमदनी घट गयी थी, लेकिन लोग
तन्दुरुस्त हो गये थे।
यंत्र का गुण तो मुझे एक भी याद नहीं आता, जबकि उसके अवगुणों से
मैं पूरी किताब लिख सकता हूँ।
पाठक : यह सारा लिखा हुआ यंत्र की मदद से छापा जाएगा और उसकी
मदद से बाँटा जाएगा, यह यंत्र का गुण है या अवगुण ?
संपादक : यह ‘जहर की दवा जहर है’ की मिसाल है। इसमें यंत्र का कोई
गुण नहीं है। यंत्र मरते-मरते कह जाता है कि ‘मुझसे बचिये, होशियार रहिए,
मुझसे आपको कोई फायदा नहीं होने का।’ अगर ऐसा कहा जाए कि यंत्र ने
इतनी ठीक कोशिश की, तो यह भी उन्हीं के लिए लागू होता है जो यंत्र की
जाल में फँसे हुए हैं।
लेकिन मूल बात न भूलिएगा। मन में यह तय कर लेना चाहिए कि यंत्र
खराब चीज है। बाद में हम उसका धीरे-धीरे नाश करेंगे। ऐसा कोई सरल
रास्ता कुदरत ने ही बनाया नहीं है कि जिस चीज़ की हमें इच्छा हो वह तुरन्त
मिल जाए। यंत्र के ऊपर हमारी मीठी नज़र के बजाय जहरीली नज़र पड़ेगी
तो आख़िर वह जाएगा ही।
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