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हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 150 में से

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हिन्द स्वराज्य
उज्ज्वल, शानदार बनाना चाहिए। हमें अपनी भाषा में ही शिक्षा लेनी चाहिए,
इसके क्या मानी हैं, इसे ज्यादा समझाने का यह स्थान नहीं है। जो अंग्रेजी
पुस्तकें काम की हैं, उनका हमें अपनी भाषा में अनुवाद करना होगा। बहुत
से शास्त्र सीखने का दंभ और वहम हमें छोड़ना होगा। सबसे पहले तो धर्म
की शिक्षा या नीति की शिक्षा दी जानी
चाहिए। हर एक पढ़े-लिखे हिन्दुस्तानी हिन्दुस्तान कभी नास्तिक नहीं
को अपनी भाषा का, हिन्दू को संस्कृत बनेगा। हिन्दुस्तान की भूमि में
का, मुसलमान को अरबी का, पारसी को नास्तिक फल-फूल नहीं सकते।
फ़ारसी का और सबको हिन्दी का ज्ञान बेशक, यह काम मुश्किल है।
होना चाहिए। कुछ हिन्दुओं को अरबी धर्म की शिक्षा का ख़्याल करते
और कुछ मुसलमानों और पारसियों को ही सिर चकराने लगता है। धर्म के
संस्कृत सीखनी चाहिए। उत्तरी और आचार्य दंभी और स्वार्थी मालूम
पश्चिमी हिन्दुस्तान के लोगों को तमिल होते हैं। उनके पास पहुँचकर हमें
सीखनी चाहिए। सारे हिन्दुस्तान के लिए नम्र भाव से उन्हें समझाना होगा।
जो भाषा चाहिए, वह तो हिन्दी ही होनी उसकी कुंजी मुल्लों, दस्तूरों और
चाहिए। उसे उर्दू या नागरी लिपि में ब्राह्मणों के हाथ में है, लेकिन
लिखने की छूट रहनी चाहिए। हिन्दू- उनमें अगर सद्बुद्धि पैदा न हो,
मुसलमानों के संबंध ठीक रहें, इसलिए तो अंग्रेजी शिक्षा के कारण हममें
बहुत से हिन्दुस्तानियों का इन दोनों जो जोश पैदा हुआ है उसका
लिपियों को जान लेना जरूरी है। ऐसा होने उपयोग करके हम लोगों को नीति
से हम आपस के व्यवहार से अंग्रेजी को की शिक्षा दे सकते हैं। यह कोई
निकाल सकेंगे। बहुत मुश्किल बात नहीं है।
और यह सब किसके लिए जरूरी है? हिन्दुस्तानी सागर के किनारे पर ही
हम जो गुलाम बन गये हैं उनके लिए। मैल जमा है। उस मैल से जो गंदे
हमारी गुलामी की वजह से देश की प्रजा हो गये हैं उन्हें साफ होना है।
गुलाम बनी है। अगर हम गुलामी से छूट
जाएँ, तो प्रजा तो छूट ही जाएगी।
पाठक : आपने जो धर्म की शिक्षा की बात कही वह बड़ी कठिन है।
संपादक : फिर भी उसके बिना हमारा काम नहीं चल सकता। हिन्दुस्तान
कभी नास्तिक नहीं बनेगा। हिन्दुस्तान की भूमि में नास्तिक फल-फूल नहीं
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