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हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 105, कुल 150 में से

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पृष्ठ 105

हिन्द स्वराज्य
ऐसा लगता है कि आप यह तो कुबूल करते हैं कि हमें सरकार के पास
अर्जियां भेजने से कुछ नहीं मिला है और न आगे कभी मिलने वाला है। तो
फिर उन्हें मारकर हम क्यों न लें ? ज़रूरत हो उतनी मार का डर हम हमेशा
बनाये रखेंगे। बच्चा अगर आग में पैर रखे और उसे आग से बचाने के लिए
हम उस पर रोक लगाएँ, तो आप भी इसे दोष नहीं मानेंगे। किसी भी तरह
हमें अपना काम पूरा कर लेना है।
साधन और साध्य, ज़रिया संपादक : आपने दलील तो अच्छी की। वह
और मुराद के बीच कोई ऐसी है कि बहुतों ने उससे धोखा खाया है। मैं
संबंध नहीं है। यह बहुत भी ऐसी ही दलील करता था, लेकिन अब मेरी
बड़ी भूल है। इस भूल के आँखें खुल गई हैं और मैं अपनी गलती समझ
कारण जो लोग धार्मिक सकता हूँ। आपको वह गलती बताने की
कहलाते हैं, उन्होंने घोर कर्म कोशिश करूँगा।
किये हैं। यह तो धतूरे का पहले तो इस दलील पर विचार करें कि
पौधा लगाकर मोगरे के अंग्रेजों ने जो कुछ पाया वह मार-काट करके
फूल की इच्छा करने जैसा पाया, इसलिए हम भी वैसा ही करके मनचाही
हुआ। मेरे लिए समुद्र पार चीज पाएँ। अंग्रेजों ने मार-काट की और हम भी
करने का साधन जहाज़ ही कर सकते हैं, यह बात तो ठीक है, लेकिन मार-
हो सकता है। अगर मैं पानी काट से जैसी चीज उन्हें मिली वैसी ही हम भी
में बैलगाड़ी डाल दूँ तो वह ले सकते हैं। आप कुबूल करेंगे कि वैसी चीज
गाड़ी और मैं दोनों समुद्र के हमें नहीं चाहिए।
तले पहुँच जाएँगे। जैसे देव आप मानते हैं कि साधन और साध्य, ज़रिया
वैसी पूजा। और मुराद के बीच कोई संबंध नहीं है। यह बहुत
बड़ी भूल है। इस भूल के कारण जो लोग
धार्मिक कहलाते हैं, उन्होंने घोर कर्म किये हैं।
यह तो धतूरे का पौधा लगाकर मोगरे के फूल की इच्छा करने जैसा हुआ।
मेरे लिए समुद्र पार करने का साधन जहाज़ ही हो सकता है। अगर मैं पानी
में बैलगाड़ी डाल दूँ तो गाड़ी और मैं दोनों समुद्र के तले पहुँच जाएँगे। जैसे
देव वैसी पूजा यह वाक्य बहुत सोचने लायक है। उसका गलत अर्थ करके
लोग भुलावे में पड़ गए हैं। साधन बीज है और साध्य (हासिल करने की
चीज) पेड़ है।
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