हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
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विचार ही नहीं किया है। अंग्रेज गोला-बारूद से पूरी तरह लैस हैं, इससे मुझे
डर नहीं लगता, लेकिन ऐसा तो दीखता है कि उनके हथियारों से उन्हीं के
ख़िलाफ़ लड़ना हो, तो हिन्दुस्तान को हथियारबंद करना होगा।
अगर ऐसा हो सकता हो तो इनमें कितने साल लगेंगे ? और तमाम
हिन्दुस्तानियों को हथियारबंद करना तो हिन्दुस्तान को यूरोप सा बनाने जैसा
होगा। अगर ऐसा हुआ तो आज यूरोप के जो बेहाल हैं वैसे ही हिन्दुस्तान के
भी होंगे। थोड़े में हिन्दुस्तान को यूरोप की सभ्यता अपनानी होगी। ऐसा ही
होने वाला हो तो अच्छी बात यह होगी कि जो अंग्रेज उस सभ्यता में कुशल
हैं, उन्हीं को हम यहाँ रहने दें। उनसे थोड़ा-
बहुत झगड़ कर कुछ हक हम पाएँगे, कुछ नहीं खून तो हमें अपना करना
पाएँगे और अपने दिन गुजारेंगे। चाहिए, क्योंकि हम नामर्द
लेकिन बात तो यह है कि हिन्दुस्तान की बन गये हैं, इसीलिए हम
प्रजा कभी हथियार नहीं उठायेगी। न उठाये यह खून का विचार करते हैं।
ठीक ही है। ऐसा करके आप किसे
पाठक : आप तो बहुत आगे बढ़ गये। सबके आज़ाद करेंगे ? हिन्दुस्तान
हथियारबंद होने की ज़रूरत नहीं। हम पहले तो की प्रजा ऐसा कभी नहीं
कुछ अंग्रेजों का खून करके आतंक फैलाएँगे। चाहती। हम जैसे लोग ही
फिर तो थोड़े लोग हथियारबंद होंगे, वे जिन्होंने अधम सभ्यता रूपी
खुल्लमखुल्ला लड़ेंगे। उसमें पहले तो बीस- भाँग पी है, नशे में ऐसा
पचीस लाख हिन्दुस्तानी ज़रूर मरेंगे, लेकिन विचार करते हैं। खून करके
आखिर हम देश को अंग्रेजों से जीत लेंगे। हम जो लोग राज करेंगे, वे प्रजा
गुरील्ला (डाकुओं जैसी) लड़ाई लड़कर को सुखी नहीं बना सकेंगे।
अंग्रेजों को हरा देंगे।
संपादक : आपका ख़्याल हिन्दुस्तान की पवित्र भूमि को राक्षसी बनाने
का लगता है। अंग्रेजों का खून करके हिन्दुस्तान को छुड़ाएंगे ऐसा
विचार करते हुए आपको त्रास क्यों नहीं होता ? खून तो हमें अपना
करना चाहिए, क्योंकि हम नामर्द बन गये हैं, इसीलिए हम खून का विचार
करते हैं।
ऐसा करके आप किसे आज़ाद करेंगे ? हिन्दुस्तान की प्रजा ऐसा कभी
नहीं चाहती। हम जैसे लोग ही, जिन्होंने अधम सभ्यता रूपी भाँग पी है, नशे
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