सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 74

( ५२ ) हारीतसंहिता । [ प्रथमस्थाने-
सप्तमोऽध्यायः ७.
अथ पानीका वर्ग ।
अथातः संप्रवक्ष्यामि पानीयानि पृथक्पृथक् ॥
शृणुध्वं च समासेन गुणान्गुणविपर्ययम् ॥ १ ॥
अब अलग अलग पानीके गुण और अगुण संक्षेपसे कहूँगा सुनो ॥ १ ॥
अथ जलके भेद ।
द्विविधं चोदकं प्रोक्तमन्तरिक्षं तथौद्भिदम् ॥ आन्तरिक्षं तु द्विविधं गाङ्गं सामुद्रिकं पयः ॥ २ ॥ तच्चतुर्विधं प्रोक्तमन्तरिक्ष-
समुद्भवम् ॥ भूमौ निपतितं तच्च जातं चाष्टविधं जलम् ॥ ३ ॥
गाङ्गसामुद्रविज्ञानं कथयिष्यामि सांप्रतम् ॥ धारितं येन पात्रेण
लक्ष्यते तेन तद्विधम् ॥ ४ ॥
पानी दो प्रकारका कहा है आंतरिक्ष अर्थात् आकाशका, दूसरा औद्भिद अर्थात्
पृथिवीका और आंतरिक्ष पानी भी दो प्रकारका है एक गांग, दूसरा सामुद्रिक ॥२॥ वैसे ही
आकाशसे उपजा पानी चार प्रकारका कहा है और पृथिवीमें पतित हुआ वही पानी आठ
प्रकारका है ॥ ३ ॥ गांग और सामुद्र पानीके विज्ञानको अब कहताहूँ । जिस पात्र करके
धारण किया जावे उसीप्रकारसे दीखता है ॥ ४ ॥
अथ गांगपानीकी परीक्षा ।
धौतं शुद्धं सितं वस्त्रं चतुर्हस्तप्रमाणकम्॥दण्डास्त्रिहस्ताश्चत्वार-
श्चतुष्कोणेषु बन्धयेत् ॥५॥तस्मात्परीक्ष्यं त्तोयं शुद्धे रौप्य-
मयेऽथवा ॥ कांस्यपात्रे समुद्धृत्य परीक्षेत भिषग्वरः ॥ ६॥
शुद्धकार्पासतूलं वा श्वेतशाल्योदनस्य वा॥पिण्डिका तत्समा-
क्षिता श्वेततां याति सा पुनः ॥ ७॥ श्वेता तु निम्र्मला पिण्डी
शुद्धञ्च निर्मलं पयः ॥ तद्गाङ्गं सर्वदोषघ्नं गृहीताङ्गं सुभाजने॥८॥
धोया, शुद्ध, श्वेत चार हाथका कपड़ा तीन तीन हाथके चार दंडोंसे चारो कोनोंमें
बांधे और उसमें जल छोड़के टपकावे, अथवा शुद्ध चांदीके बर्तन या काँसेके पात्रमें शुद्ध
कपासकी रूई या सफेद चावलके भातकी पिण्डी छोड़े । यदि इन सब कामोंसे भी पानी साफ
ही निकले तो समझ लेना चाहिये गंगाका जल है । भातकी पिंडी भी सफेद ही चाहिये
और वह जल सब दोषोंका नाश करने वाला है ॥ ५ ॥ ६ ॥ ७ ॥