सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 65

अ० ५ ] भाषार्टीकासमेता । ( ३३ )
विशेषेण तु वर्जयेत् ॥३५॥ करोति कफरक्तस्य कोपनं बहुरो-
गकृत् ॥ श्रमग्लानिपिपासासुतन्द्रानिद्राकरो भृशम् ॥ ३६ ॥
वस्त्रकी हवा घावपै शोजेवालेको अच्छी नहीं है और लाल वस्त्रसे उपजी हुई हवाको विशेष
करके त्यागे ॥ ३५ ॥ क्योंकि लाल वस्त्रकी हवा कफ रक्तको कुपित करती है और बहुतसे
रोगोंको उपजाती है और परिश्रम, ग्लानि, पिपासा, तंद्रा और नींदको अति करती है॥३६॥
वेणुवायुगुण ।
वैणवं व्यजनं तन्द्रानिद्राकरणमेव च ॥
रूक्षोऽतिकषायरसो न च वातप्रकोपनः ॥ ३७ ॥
बाँसका पंखा, तंद्रा और नींदको करता है, रूखा है, अतिकसैला रसवाला है और वातको
कोपित नहीं करता है ॥ ३७ ॥
कांस्यपात्रवायुके गुण ।
कांस्यपात्रमरूद्धक्षः सोष्णो वातस्य शान्तिकृत् ॥
दाहश्रमघ्नः स्वेदघ्नो निद्रासौख्यकरो नृणाम्॥ ३८ ॥
कांस्यपात्रकी हवा रूखी है, गरम, वातको शांत करती है,दाह और श्रमको हरती है, पसीना
मारती है, मनुष्योंके नींद और सुखको करती है ॥ ३८ ॥
रम्भातालपत्रवायुके गुणः।
तालपत्रकरम्भाया दलस्य व्यजनो हिमः ॥ मधुरोऽतिश्रमघ्नः
स्यादा‌र्द्रत्वात्कफकोपनः ॥ ३९ ॥ निद्राकरः प्रीतिकरः शोक-
रोगविकारहा॥दाहपित्तश्रमग्लानिनाशनो भ्रमशान्तिकृत्४०॥
ताड़की पत्ते और केलेके पत्तेका पंखा शीतल है, मधुर है, अतिश्रमको हरता हैं और गीले-
पनेसे कफको कोपता है ॥ ३९ ॥ नींद करता है, प्रीतिकरता है,शोक, रोग और विकारको
नाशता है और दाह,पित्त, परिश्रम,ग्लानिको नाशता है और भ्रमकी शांति करता है ॥ ४० ॥
खस, शिखिपुच्छ व्यजनवायुके गुण ।
उशीरमूलरचितं व्यजनं शिखिपिच्छकैः ॥ व्यजनेन सुगन्धः
स्यान्मन्दशीतगुणात्मकः ॥ ४१॥ ग्लानिम्पूर्च्छाश्रमशोषविस-
र्पविषदर्पहा ॥इति पञ्चविधो वायुरुपायेन कृतो नृणाम् ॥४२॥
खसकी जड़ और मयूरके पंखका पंखा डुलानेसे सुगन्ध और कुछ शीत गुणवाला होता है
॥ ४१ ॥ ग्लानि, मूर्च्छा, श्रम, शोष, विसर्प,और विषको हटाता है, इस तरह पांच प्रकारका
वायु उपायसे किया हुआ होता है ॥ ४२ ॥
३