हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५०२ ) हारितसंहिता। [ पंचमस्थाने-अ० ५
हेमंतऋतुमें गूगल निकसता है कहीं तो चांदीके समान सफेद होता है कहीं पद्मरागके समान
होता है ॥ ४ ॥ कहीं भैंसाके नेत्रोंके समान वर्णवाला होता है वह यक्षदेवता इनको
प्रिय है सो इसका विधान विधिसे कहते हुए मुझसे सुनो ॥ ५ ॥ यह त्रिदोषको शांत कर-
नेवाला है वीर्यमें हित है स्निग्ध है धातुओंको बढ़ानेवाला है अग्निको दीप्त करनेवाला है और
गूगल पाकमें चर्चरा है वर्ण बल इनको बढ़ानेवाला है ॥ ६ ॥ आयुमें हित है लक्ष्मी
बढ़ानेवाला है, पुत्र, स्मृति, मेधा इनको बढ़ानेवाला है पापको शांत करनेवाला है श्रेष्ठ है
पुरुषके वीर्य स्त्रीके आर्तव इनको करनेवाला है ॥ ७॥ और वर्ण, गंध, रस इनसे संयुक्त गूग-
लमात्रसे युक्त किया हुआ और औषधोंके संग क्वाथ बनाके दिया हुआ व्याधिके अनुसार दिया
हुआ सब व्याधियोंको नाशता है ॥ ८ ॥ मात्राके अनुसार उस गूगलको देखके सफेद
वस्त्रसे छान लेवे पीछे मट्टीके पात्रमें अथवा सुवर्णके पात्रमें तथा चांदीके पात्रमें तथा
कांचके पात्रमें ॥ ९ ॥ शुभ तिथिमें और शुभ नक्षत्रमें घाल धरे पीछे भोजन जर जावे
तब क्षमासे युक्त हुआ पुरुष सुंदर पुष्पोंसे आकीर्ण हुए मंदिरमें जाके देवता ब्राह्मण इनकी
भक्ति और उपासना कर ॥ १० ॥ उस गूगलको स्थापित करदेवे और वातसे उपजे रोगमें
खाये हुए गूगलके ऊपर रास्ना, गिलोय, अरंड, दशमूल, खींप ॥ ११ ॥ अजवायन इनका
क्वाथ यथायोग्य पीवे और पित्त रोगसे पीड़ित हुए पुरुष पृथक् २ जीवनीयगणकी औषधोंमें
पकाया हुआ क्वाथ पीवे ॥ १२ ॥ बांसा, चंदन, नेत्रवाला, मुनक्का, दाख, कुटकी,
खजूर, फालसा, जीवक, ऋषभक इनका क्वाथ गूगलमें युक्तकर पित्तके रोगोंमें पीना हित
है ॥ १३ ॥ त्रिफला, सोंठ, मिरच, पीपली, गोमूत्र, नींव, धनियां, पोहकरमूल,
गिलोय, अजवायन, परवल, इनके क्वाथके संग गूगल लेना कफके रोगोंमें हित है ॥ १४ ॥
दुष्टनाडीव्रण, ग्रंथिरोग, गंडमाला, अर्बुद,प्रमेह, व्रण, इन रोगोंवाला पुरुष त्रिफलाके क्वाथके
संग पीवे ॥ १५ ॥ चिरायता, गिलोय, नींव, बांसा, कटेहली, धमासा इनके क्वा-
थके संग गूगलको पीवे ॥ १६ ॥ तो गुल्म, खांसी, चोट, श्वास, विद्रधि, अरुचि व्रण
इनका नाश होता है और दारुहलदी, परवल इनके क्वाथके संग गूगलको पीवे ॥ १७ ॥
तो खाज, पिड़िका, शोजा आदिक वात, कफ इनका नाश होता है और हरड़ै, सांठी,
दारुहलदी, गोमूत्र, दूध ॥ १८ ॥ इनके क्वाथके संग गूगल पीनेसे पांडुरोग, शोजा,
उदररोग, किलासकुष्ठ इनका नाश होता है और एक तोलासे लेकर चार तोला प्रमाणतक
गूगलका खाना हित है ॥ १९ ॥ जब खाया हुआ गूगल जरजावे तब मूंगोंका यूष
और जांगलदेशके जीवोंके रसके संग भोजन करना हित है और दूधके संग सांठी चावल
और शालीसंजक चावलोंको खावे ॥ २०॥ सातदिन गूगलका सेवन करना प्रथम मात्रा
है और १४ दिनतक मध्यम मात्रा और इक्कीस दिनतक सेवन करनेको परममात्रा
कहते हैं, ऐसे योग युक्तिको जाननेवालोंने कहा है ॥ २१ ॥ और जो पुरुष क्रमसे वर्ष
दिनतक गूगलको सेवता है उसको स्थावर और जंगमविषोंकी मात्रा दुःख नहीं देती है