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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 410

( ३७८ ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने-
भक्षयेत्प्रातस्तस्योपरि जलं पिबेत् ॥ २९ ॥ कथितं च विरे-
काय वातगुल्मोपशान्तये ॥ ३० ॥
सोंठ, वायविडंग, हरड़ै, तीन भाग निशोत इनके चूर्णमें गुड़ मिला वातगुल्ममें जुलाबके
वास्ते देना चाहिये ॥ २७ ॥ जमालघोटाकी जड एक भाग, हरड़ै दो भाग, निशोत तीन
भाग, सोंठ चार भाग ॥ २८ ॥ इस प्रकार इनको ले चूर्ण बना उसके समान गुड़
मिला उस गोलीको प्रातःकाल भक्षण करे, ऊपर औटाया हुआ जल पीवे ॥२९॥ इस प्रकार
जुलाब देनेसे वातका गुल्म शांत होता है ॥ ३० ॥
अथ पित्तके गुल्ममें जुलाब ।
पिबेदेरण्डतैलं च शर्कराक्षीरसंयुक्तम्॥पित्तगुल्मविरेकाय श्रेष्ठ-
मेतत्सुखावहम्॥३१॥आरग्वधप्रवालानि तथैवारग्वधानि च॥
विभाव्यैरण्डतैलेनैरण्डपत्रैस्तु वेष्टयेत् ॥ ३२ ॥ कर्द्मेन प्रलि-
प्याथ अङ्गारेषु च स्थापयेत् ॥ सुस्विन्नभार्जितां ताञ्च भक्षये-
च्छर्करान्विताम् ॥ ३३ ॥ विरेकः पैत्तिके गुल्मे हितं शुद्धवि-
रेचनम् ॥ ३४ ॥
अरंडीके तैलमें खांड और दूध मिलाके पीवे यह जुलाब पित्तके गुल्ममें श्रेष्ठ और सुखको
देनेवाला कहा है ॥ ३१ ॥ अमलतासके पत्ते तथा अमलतास इनको अरंडीके
तेलमें भावना दे फिर अरंडके पत्तोंमें लपेट ॥ ३२ ॥ गारासे लीप अंगारोंमें रख देवे जब
अच्छी तरह पक जावे तब खांड मिलाके भक्षण करे ॥ ३३ ॥ पित्तसे उपजे गुल्ममें यह
जुलाब हित और शुद्ध कही है ॥ ३४ ॥
अथ कफगुल्मपर विरेचन ।
त्रिफलासुरसाशुण्ठीचूर्ण कृत्वा विभावयेत्॥स्नुहीक्षीरेण वारैकं
गुडेन सह मिश्रितम् ॥३५॥ विरेकः श्लेष्मके गुल्मे सर्वोदरवि-
नाशनः॥३६॥ शुण्ठी सौवर्चलं पथ्या विडङ्गञ्च पुनर्नवा ॥
चूर्णेऽपामार्गबीजानां स्नुहीक्षीरेण भावितम् ॥ ३७ ॥ गुडेन
संयुक्तं खादेत्पश्चादुष्णं जलं पिबेत्॥विरेकः सर्वगुल्मेषु प्रशस्तो
हितकारकः ॥ ३८ ॥
त्रिफला, तुलसी, सोंठ इनका चूर्ण बना एक वार थोहरके दूधमें भावना दे गुड़में मिला
भक्षण करे ॥ ३५ ॥ यह जुलाब कफके गुल्ममें हित कही है और सब प्रकारके उदररोगोंका