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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 548 में से

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पृष्ठ 41

अ० २ ] भाषाटीकासमेता । ( ९ )
अथ कायचिकित्साका लक्षण-काढ़ा, चूरन और गोली स्वेदन, स्नेहन, वमन,
विरेचन और बस्तिकर्म ये सब और कोष्ठके रोगोंको शांत करनेवाली क्रिया कायचिकित्सित
कहाती है ॥ १५ ॥
अथ अगदोंके नाम ।
गुदामयं बस्तिरुजं शमनं बस्तिरूहकम् ॥
आस्थापनानुवासन्तु अगदं नामएव च ॥ १६ ॥
अथ अगदतंत्रलक्षण-गुदाके रोग और मूत्राशयके रोगको शांत करना, निरूहबस्ति,
आस्थापन बस्ति, अनुवासन बस्ति ये सब अगदतन्त्रनामसे विख्यात हैं ॥ १६ ॥
अथ बालचिकित्सा ।
गर्भोपक्रमविज्ञानं सूतिकोपक्रमस्तथा ॥
बालानां रोगशमनी क्रिया बालचिकित्सितम् ॥ १७॥
अथ बालचिकित्सितका लक्षण-गर्भके भलीभांति आरम्भका सूतिकाकी चिकि-
त्साका विज्ञान और बालकोंके रोगको शमन करनेवाली क्रिया बालचिकित्सा कहलाती है॥ १७॥
अथ विषतन्त्रके नाम ।
सर्पवृश्चिकलूतानां विषोपशमनी तु या ॥
सा क्रिया विषतन्त्रञ्च नाम प्रोक्ता मनीषिभिः ॥ १८ ॥
अथ विषतन्त्रका लक्षण-सांप, बीछू और मकड़ीके विषको शांत करनेवाली क्रिया
बुद्धिमानोंसे विषतन्त्र नामकी कही जाती है ॥ १८ ॥
अथ भूतविद्याकानाम ।
ग्रहभूतपिशाचाश्च शाकिनीडाकिनीग्रहाः ॥
एतेषां निग्रहः सम्यग्भूतविद्या निगद्यते ॥ १९ ॥
अथ भूतविद्याका लक्षण-ग्रह, भूत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी, ग्रह इनका
अच्छी तरह निग्रह करना भूतविद्या कहाती है ॥ १९ ॥
अथ वाजीकरण ।
क्षीणानां चाल्पवीर्याणां बृंहणं बलवर्द्धनम् ॥
तर्पणं समधातूनां वाजीकरणमुच्यते ॥ २० ॥


१ 'ज्ञात्वारम्भ उपक्रमः, प्रक्रमः स्यादुपक्रमः, उपायपूर्व आरम्भ उपधा चाप्युपक्रमः' इत्यमरः ।
२ ग्रहशब्देभ्य पुनरुक्त्या बालग्रहाणां सूर्यादीनां च ग्रहणम् ।