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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 355

अ० १२ ] भाषाटीकासमेता । ( ३२३ )
लघुपंचमूलका क्वाथ बना उसमें सैंधानमक, आंवला, इनका कल्क बना और पीपल
मिला इस क्वाथके पीनेसे वातसे उपजी छर्दि दूर होती है ॥ ५० ॥ और दूधमें खांड मिला
पीनेसे पित्तसे उपजी छर्दि शीघ्रही नष्ट होती है और दाख, क्षीरविदारी इनके चूर्णका सारघ
शहतमें लेह बना पीनेसे पित्तछर्दिका नाश होता है ॥ ५१ ॥ और त्रिफला, पोहकरमूल,
चच, हरड़ै, सैंधानमक इनका चूर्ण बना गुड़में मिला चाटनेसे कफकी छर्दि दूर होती
है और जिसके ज्यादे मूत्र उतरता हो उसको भी इसीका पीना श्रेष्ठ है ॥ ५२ ॥ और
कचूर, देवदार, हरड़ै, सोंठ, पीपल इनके चूर्णको घृतमें अथवा तक्रमें मिला खानेसे
त्रिदोषसे उपजी छर्दि दूर होती है ॥ ५३ ॥ और शालीचावलोंकी खीलोंमें शहद और खांड
मिला खानेसे शीघ्र ही ज्वरकी पीडाका नाश होता है ॥ ५४ ॥ आंवलाके रसमें चंदनको
घिस तिसमें शहद मिला आंवलाके प्रमाण गोली बांधलेवे । यह लेह वमनको निश्चय नाशता
है ॥ ५५ ॥ अदरखका रस, अनारदानाका रस, जीरा, खांड, तैल, शहद इनके कवलग्रह
अर्थात् ग्रास बनाके मुखमें धारण करे ॥ ५६ ॥ इस ग्रासोंके धारण करनेसे वात आदिक दोषोंसे
उपजीहुई तथा दोदोषोंसे उपजी हुई और तीन दोषोंसे उपजीहुई वमन दूर होती है ॥ ५७ ॥
और सोंठ, मिरच, पीपल, हलदी, दारुहलदी, त्रिफला, मदिरा, जवाखार, इनको समान
भागले चूर्ण बना शहदमें खानेसे छर्दिका निवारण होता है ॥ ५८ ॥ और अनारदाना, दाख,
इन्होंको मिला अथवा हरड़ै, सूंठ, इनको गुड़ मिलाय अथवा निशोथ, सूंठ इनको गुड़में
मिला खानेसे वमन दूर होती है ॥ ५९ ॥
अथ पित्तकी छर्दिको चिकित्सा ।
पर्पटं सगुडं क्वाथं शीतलं पाययेन्नृणाम्॥हन्ति वमिं महाघोरां
सपित्तां अस्रसंयुताम् ॥६०॥ काकोली काकमाची च क्वाथं
शर्करया युतम्॥लाजाशर्करसंयुक्तं हंति पित्तवमिं नृणाम् ६१॥
मातुलुङ्गरसश्चैव पथ्या शर्करया युतः ॥ हन्ति कासं पित्तभवं
वमिं शीघ्रं नियच्छति॥६२॥हृद्वा पित्तवमिं घोरां सदाहभ्रम-
दायिनीम् ॥ तस्यारग्वधपत्राणि मधुशर्करयान्वितम् ॥६३ ॥
क्षीरपानं प्रशस्तं वा मुस्ताशर्करयान्वितम् ॥ ६४ ॥
पित्तपापडा,गुड़ इनका क्वाथ बना शीतलकर मनुष्योंको पिलानेसे पित्तसहित और अस्रसहित
महाघोर वमन दूर होती है ॥ ६० ॥ काकोली, मकोह, इनका क्वाथ बना उसमें खांड मिला
पीनेसे अथवा धानकी खीलोंके रसमें खांड मिला पीनेसे पित्तकी छर्दि दूर होती है ॥ ६१ ॥
बिजौराके रसमें हरड़ैका चूर्ण और खांड मिला पीनेसे पित्तसे उपजी खांसी और वमन दूर