हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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अथ रक्तवृद्धिकारक औषध ।
घृतदुग्धसिताक्षौद्रमरीचानि च पिप्पली ॥
पानं शस्तं मनुष्याणां रक्तवृद्धिकरं परम् ॥ ३० ॥
घृत, दूध, मिश्री, शहद, मिर्च और पीपल इनका पीना हित है। मनुष्योंके रक्तकी वृद्धि
करनेवाला है ॥ ३० ॥
अथ मेदोवृद्धिकारक औषध ।
अनूपानि च धान्यानि लघुनामानि कल्पयेत्॥कल्यांश्च घृत-
दुग्धादीन्सेवयेन्मधुराणि च ॥ ३१ ॥ रसांश्च जाङ्ग्लानि स्युः
सेवनार्थे भिषग्वर ॥३२॥ सितोपलादिकं चूर्णमजाक्षीरं सको-
लकम् ॥ हितं पानं क्षये चैव कल्यंमप्रातराशनम् ॥ ३३ ॥
अनूपदेशके जीवोंका मांस, हल्के अन्न, घृत, दूध, कल्यसंज्ञक मदिरा, मधुरपदार्थ इनका
सेवन हित है ॥ ३१ ॥ और हे वैद्योंमें श्रेष्ठ ! जांगलदेशके जीवोंका रस सेवना हित है
॥३२॥और सितोपला आदि चूर्ण और पीपलीसे संयुक्त किया हुआ बकरीका दूध पीना हित
है। सायंकालमें भोजनके समय और कल्प कहिये प्रभातकालमें करे ॥ ३३ ॥
अथ अस्थिवृद्धिकारक औषध ।
पक्वानि घृतशस्तानि क्षीराणि विविधानि च ॥ चन्दनानि च
द्राक्षादिचूर्णानि च भिषग्वर ॥ ३४ ॥ जांगलानि च सर्वाणि
सेवनीयानि पुत्रक ॥ अन्नानि च मधुराणि सर्वाणि च प्रयो-
जयेत् ॥ ३५ ॥
पके हुए घृत और अनेकप्रकारके दूध ये श्रेष्ठ हैंऔर हे उत्तम वैद्य ! चन्दन और द्राक्षादिक
चूर्ण हित है ॥ ३४ ॥ और हे पुत्र ! सब प्रकारके जांगलदेशके जीवोंके मांस सेवनेमें हित हैं
सब प्रकारके मीठे अन्न सेवनेमें हित हैं ॥ ३५ ॥
अथ शुक्रवृद्धिकारक औषध ।
शुक्रक्षये प्रपाकानि रसानि च विशेषतः॥ नवनीतं तथा क्षीरं
मधुराणि च सेवयेत् ॥ ३६ ॥ कर्कटीमुलपयसा विदारीकन्द-
शाल्मली ॥ सितान्व्यपानं च हितं शस्यन्ते मधुराणि च ॥३७॥
अग्रे चूर्णानि वक्ष्यन्ते शुक्रवृद्धिकराण्यर्थ ॥ ३८ ॥
१कल्यमप्रातराशनं कल्यं मधु अप्रातराशने प्रातःकालातिरिक्तसमये अशनंभोजनमित्यर्थः। आङ्पूर्वकंमशनम्
आशनम्।