हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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कफशूलवालोंको लंघन कराना, वमन कराना, पाचन औषध देना हित है, और कड़े
पदार्थ, अत्यंत मीठा पदार्थ नहीं देवे और शयन नहीं करावे ॥ ४५ ॥
अथ बिल्वादिक्वाथ ।
बिल्वाग्निमन्थवृषाचित्रकनागराश्च एरण्डहिङ्गु सहसैन्धवकं
समाशम् ॥ क्वाथः सदैव कफजं विनिहन्ति शूलं सद्यःकरोति
जठरानलवर्द्धनं च ॥ ४६ ॥
बेलगिरी, अरणी, वांसा, चीता, सोंठ, अरंड, हींग, सैंधानमक इनको समान-
भाग ले क्वाथ बना देनेसे शीघ्र ही कफसे उपजे शूलको दूर करता है और जठराग्निको
बढ़ाता है ॥ ४६ ॥
अथ मातुलुङ्गादिरस ।
मातुलुङ्गरसं धात्रीरसं सैन्धवसंयुक्तम्॥ शोभाञ्जनकमूलस्य रसं
च मरिचान्वितम् ॥४७॥ सक्षारमधुनोपेतं श्लेष्मशूलनिवार-
णम् ॥ कृतक्षयोद्भवं कासं नाशयत्याश्वसंशयम् ॥ ४८ ॥
बिजौरेका रस, आंवलेका रस इनमें सैंधानमक मिला और सहजिनेकी जड़के रसमें काली
मिर्च मिला ॥ ४७ ॥ फिर जवाखार, शहद, इनसे युक्त कर इनके देनेसे कफका शूल दूर
होता है और क्षयरोगसे उपजीहुई खांसीको शीघ्रही नाशता है ॥ ४८ ॥
अथ तुवरादिचूर्ण ।
तुवरं ग्रन्थिकैरण्डा व्योषं पथ्याजमोदकम् ॥
सक्षारलवणोपेतं चूर्णं शूले कफात्मके ॥ ४९ ॥
सफेद शिरस, पीपलमूल, अरंड, सोंठ, मिर्च, पीपल, हरड़े, अजमोद, जवाखार, नमक
इनका चूर्ण कफसे उपजे शूलको दूर करता है ॥ ४९ ॥
अथ एरंडादि क्वाथ ।
एरण्डबिल्वबृहतीद्वयमातुलुङ्ग-पाषाणभित्रिकटूमूलकृते कषाये॥
सक्षारहिङ्गुलवणाश्च सुतैलमिश्राः श्रोण्यंसमेढ्रहृदयस्तनकु-
क्षिदेयम् ॥ ५० ॥
अरंड, बेलगिरी, दोनोंकटेहली, बिजौरा, पाषाणभेद, त्रिकटु, सोंठ, मिर्च, पीपल, इनसे
कियेहुए क्वाथमें जवाखार, हींग, नमक, तेल इनको मिला फिर, कटि, कंधे, लिंग, हृदय,
कुक्षी, चूंची, इन स्थानोंमें इसकी मालिस करनी चाहिये ॥ ५० ॥
Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu