हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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निंबक्वाथ अथवा अडूसाका काथ .... २८६ | गुदामें अर्शका स्थान .... ३००
वासाकी प्रशंसा .... ,, | अर्शकी चिकित्साका प्रकार .... ,,
तालीस चूर्ण .... २८७ | अर्शरोगके उपद्रव .... ,,
अडूसाका काथ और कल्क .... ,, | असाध्यअर्श .... ३०१
नासामवृत्तरुधिरचिकित्सा .... २८८ | पाचनक्वाथ .... ,,
हारितालकादि नस्य .... ,, | कल्कयोग .... ,,
आम्रादि नस्य .... ,, | पत्रकादिक्वाथ .... ,,
पलांड्वादि नस्य .... २८९ | पिप्पल्यादि योग .... ३०२
वासादि पानक .... ,, | वार्ताकयोग .... ,,
दाडिमादि रस .... ,, | भल्लातकचतुष्टय .... ,,
मुखमें प्रवृत्त हुए रुधिरकी चिकित्सा ,, | कल्याणनामकलवण .... ,,
दाडिमपुष्पादि नस्य .... ,, | भल्लातक वटक .... ३०३
शतावरीघृत .... २९१ | प्राणदेनेवाला मोदक .... ,,
मृद्वीका आदि घृत .... ,, | कांकायन गुटिका .... ३०४
कूष्मांडायवलेह .... २९२ | लवणोत्तमादि .... ३०५
अन्य कूष्माण्डका अवलेह .... २९३ | एलादिगुटिका .... ,,
खंडखाद्यरसायन .... ,, | अर्शनाशकचतुःसम मोदक .... ,,
रक्तातिसारचिकित्सा .... २९५ | त्रिकटुकाद्यमोदक .... ,,
योनिप्रवाहचिकित्सा .... ,, | मरिचाद्यमोदक .... ३०६
अर्शचिकित्सा .... २९६ | सूरणपिंड .... ,,
अर्शके प्रकार .... ,, | भीमवटक .... ,,
वातार्शके हेतु और संप्राप्ति .... २९७ | चव्याद्यघृत .... ३०७
पित्तार्शका हेतु .... ,, | पिप्पल्याद्यतैल .... ,,
कफार्शका हेतु .... ,, | मुस्ताद्यवटक .... ३०८
वातार्शका लक्षण .... २९८ | भल्लातकगुड़ .... ३०९
पित्तार्शका लक्षण .... ,, | अन्यभल्लातकगुड़ .... ,,
कफार्शका लक्षण .... ,, | भल्लातकावलेह .... ३१०
त्रिदोषार्शका लक्षण .... ,, | रक्त बवासीरकी चिकित्सा .... ३११
गुदरोगलक्षण .... ,, | वर्तियोग .... ३१२
अर्शके स्थान .... २९९ | देवादाल्यादिलेप .... ,,