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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 184

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( १५२ ) हारीतसंहिता । [द्वितीयस्थाने-
अथ अश्विनी नक्षत्र ।
अश्विन्याः प्रथमे भागे दिनमेकं प्रकीर्तितम्॥
द्वितीये पञ्चरात्रन्तु तृतीये सप्तकं तथा ॥ ६० ॥
अश्विनीके प्रथम भागमें एक दिन पीडा रहती है और दूसरे भागमें पंचरात्रि और तीसरे
भागमें सात रात्रि पीडा रहती है ॥ ६० ॥
अथ भरणी नक्षत्र ।
भरण्याः प्रथमे चांशे सप्तवासरमेव च ॥
मध्ये मृत्युस्तथा चान्त रोगो मासत्रयावधि॥ ६१ ॥
भरणीके प्रथमभागमें सातदिन पीडा रहती है और दूसरे भागमें मृत्यु और तीसरे भागमें
तीन महीने पीडा रहती है ॥ ६१ ॥
अथ नक्षत्रारिष्टोंका उपसंहार ।
एवं ज्ञात्वा सुधीः सम्यक्कुर्य्यात्प्रशमनक्रियाम्।नक्षत्रस्य त्रयो
भागा आत्रेयेण प्रकाशिताः॥६२॥ इति आत्रेयभाषिते हारी-
तोत्तरे द्वितीयस्थाने नक्षत्रज्ञानं नाम षष्ठोऽध्यायः ॥ ६ ॥
ऐसे जानके कुशल वैद्य रोगको शांत करनेकी क्रियाको करे,नक्षत्रोंके तीन भाग आत्रेयजीने
प्रकाशित किये हैं ॥ ६२ ॥ इति वेरीनिवासिबुधशिवसहायसूनुवैद्यरविदत्तशास्त्र्यनुवादितहारी-
तसंहिताभाषाटीकायां द्वितीयस्थाने नक्षत्रज्ञानं नाम षष्ठोऽध्यायः ॥ ६ ॥
सप्तमोऽध्यायः ७.
अथ होमकी विधि ।
आत्रेय उवाच ॥ अर्कः खदिरपालाशबदर्य्यः पारिभद्रकः ॥
दूर्वा शमी कुशः काशः पिप्पलो वटभूरुहः ॥१॥ जम्ब्वार्म्रो कर-
हाटश्च सोमवृक्षः कलिद्रुमः ॥ रक्तसारश्चन्दनश्च जयन्ती गुरु-
वृक्षकम् ॥ २ ॥ सहचरी सितावर्षा सर्व्वौषधिनिशायुगम् ॥
समिद्वर्गः समस्तोऽपि समिद्धोमः प्रकाशितः ॥ ३ ॥
आत्रेयजी कहते हैं-आक, खैर, पलाश, बेरी, पारिभद्र, दूर्व, छींकुर, कुशा, कास,
पीपलवृक्ष, वड़वृक्ष, ॥ १ ॥ जामुनवृक्ष, आम्रवृक्ष, पद्मकंद, श्वेतखैर, बहेडा, लाल खैर, चन्दन,