हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअ० २ ] भाषाटीकासमेता । ( १३१ )
यो मनुष्यः प्रपश्येत्प्रासादं वा देवहीनं च पश्येत्॥तापश्चान्द्रे
पुष्पितानां द्रुमाणां तस्यानिष्टं मृत्युमाशु प्रपद्येत्॥२४॥विप-
श्येन्नरो भिन्नदेवं घटं वाथवा भग्नशाखं तरुं मन्दिरं वा॥विशीर्णं
विपश्येत्सुखी व्याधिपुञ्जं प्रपद्येद्रुजायस्त आशु म्रियेत ॥२५॥
यस्याह्वयन्ति पितरो दिशि दक्षिणस्यामाश्रित्य चाशु तनुते
मनुजस्य मृत्युम् ॥ यश्चैव शूललकुटोद्यतबाणपाणीनाहूयते
स मृतिमाशु लभेन्मनुष्यः॥२६॥कार्पासभस्मास्थिकपालशूलं
चक्रं सपाशं च विलोकयेद्यः ॥ तस्यापदो रोगधनक्षयौ
वा रोगी मृतिं वा तनुतेऽतिकष्टम् ॥ २७ ॥ इति प्रदिष्टानि
शुभानि तानि निशासु सुप्ते मनुजे विशेषात् ॥ तथाशु विज्ञाय
महामते त्वं गदस्य नाशाय विधेहि मन्त्रम् ॥ २८ ॥ स्नानं
च दानं च सुरार्चनं च होमं तथा भाग्यविधानतश्च॥दुःस्वप्न-
मेतेषु विनाशमेति शुभं च सौख्यं च तनोति शीघ्रम् ॥ २९ ॥
इत्यात्रेयभाषिते हारीतोत्तरे द्वितीयस्थाने स्वप्नाध्यायो नाम
द्वितीयोऽध्यायः ॥ २ ॥
काक, कंक, ऊंट, सर्प, सूकर, उल्लू, गीध, गीदड़, भेंडिया, गधा, भैंसा, तिरखू, कुत्ता,
व्याघ्र, ग्राह, मच्छ, वानर इनसे भक्षित हुए अपने शरीरको देखे उसको हानि, दुःख, रोग
इनकी प्राप्ति होती है ॥ १७॥ जो मनुष्य अपने शरीरको घृत, वसा, तेल आदिसे भीजा-
हुआ देखे उसको रोगकी प्राप्ति शीघ्र होती है, ऐसा वैद्यों ने कहा है। वहां अरिष्टनाशकशांतिवगै-
रह करे ॥ १८ ॥ सिंह, ऊंट, गधा बैल, इनसे जुड़ेहुए रथमें बैठके जो मनुष्य दक्षिणदिशाको
गमन करें उसकी मृत्यु जानना ॥ १९ ॥ रक्तवस्त्रोंको पहननेवाली और कृष्णवस्त्रोंको पहनने-
वाली और छुटेहुए बालोंवाली और दौड़ती हुई और दक्षिणदिशामें स्थित हुई और रोती हुई
ऐसी स्त्रीको जो देखता है ॥ २० ॥ और क्रोधको प्राप्तहुई उस स्त्रीको बुलाता है अथवा
उससे मिलता है ऐसा स्वप्न सुखीको आवे तो रोगकी उत्पत्ति होती है और रोगीको आवे
तो वह रोगी मरजाता है ॥ २१ ॥ स्वप्नमें जिस सुखी मनुष्यके दांत, बाल, रोम ये गिर
पडें उसके रोगकी उत्पत्ति होती है ॥ २२ ॥ जिस सुखी मनुष्यकी स्वप्नमें शय्या टूट जावे
और भालाआदि शस्त्रके प्रहारसे देहमें रक्त दीखे वह मनुष्य व्याधिको प्राप्त होता है ॥ २३ ॥
शून्य हुए स्थानको और देवतासे रहित मंदिरको जो स्वप्नमें देखे और जो स्वप्नमें चंद्रमामें
तापको और फूले हुए वृक्षोंमें तापको देखे उस मनुष्यकी शीघ्र मृत्यु कही है ॥ २४ ॥ जो