सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 147

अ० २३ ] भाषाटीकासमेता । (११५)
अथ खीचडीका गुण ।
गुर्वीविष्टम्भजननो वातश्लेष्मकरः स्मृतः ॥ पित्तसंशमनो बल्यो
वृष्यश्चैव बलप्रदः ॥ १० ॥ मुहुस्तण्डुलसंयुक्तो माषतण्डुल-
वान् पुनः ॥ अन्यथा धान्यगुणवांल्लक्ष्यते च भिषग्वर ॥११॥
तिलानां संयुतो हृद्यो धातुपुष्टिविवर्द्धनः ॥ गुरुर्विष्टम्भमलकृद्
दुर्जरः श्लेष्मकोपनः ॥ १२ ॥
खीचडी भारी है, विष्टम्भको करती है, वातको और कफको करती है, पित्तको शांत करती है,
बलमें और वीर्य्यमें हित है और बलको देती है ॥ १० ॥ फिर चावलोंसे युक्त हुई अथवा चावल
और उड़दोंसे युक्त हुई खीचडीके भी वही गुण हैं। अन्य तरहकी खीचडी अन्नके गुणको देती
है ॥ ११ ॥ तिलोंकी खीचडी सुंदर है, धातुओंकी पुष्टिको बढाती है, भारी है, विष्टंभको और
मलको करती है, दुर्जर है, कफको कोपती है ॥ १२ ॥
अथ दालका गुण ।
सूपश्चोक्तस्त्रिदोषघ्नो व्यञ्जितश्चैव सर्पिषा ॥
धातुपुष्टिकिरः श्रेष्ठो बृंहणो बलवर्द्धनः ॥ १३ ॥
दाल त्रिदोषको नाशती है और घृतमें भूनी अथवा छोंकी हुई दाल धातुओंकी पुष्टिको करती
है, श्रेष्ठ है, धातुओंको और बलको बढ़ाती है ॥ १३ ॥
अथ खलका गुण ।
कफवातकरो हृद्यः खलको बलकारकः ॥ १४ ॥
तिलोंका खल वातको और कफको करता है, सुन्दर है और बलको करता है ॥ १४ ॥
अथ अनारका पना ।
कफानिलहरो हृद्यो दीपनो दाडिमाम्लकः ॥ १५ ॥
अनारका पना कफको और वातको हरता है, सुन्दर है और अग्निको जगाता है ॥ १५ ॥
अथ पापड़का गुण ।
पर्पटस्तैलसम्भृष्टो दोषाणां च ज्वरापहः ॥
रुचिकृद्बलकृच्चैव दाहशोषतृषापहः ॥ १६ ॥
तेलमें भुना हुआ पापड दोषोंसे उपजे ज्वरको नाशता है, रुचिको और बलको करता है,
दाह, शोष, तृषाको नाशता है ॥ १६ ॥
अथ संड़ाकीका गुण ।
सण्डाकी च गुरुः स्निग्धा दुर्जरा अतिशीतला ॥
पित्तश्लेष्मकरा बल्या धातूनां च बलप्रदा ॥ १७ ॥