हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअ० २० ] भाषाटीकासमेता । ( १०५ )
शशा, लावा, चातात, गोह, हरिण, कूटक, छिक्कर आदि और तीतर आदि, जीवक
पक्षी ॥ ८ ॥ काग अथवा मुर्गा विशेष, शिकरा, मूषा माषीविशेष ये सब जांगलसंज्ञक जीव हैं।
ये पानीके विना भी स्थित रह सकते हैं ॥ ९ ॥
अथ जलचरजीववर्णन ।
शूक्रा मृगशल्लाद्याः सलिलाशयमाश्रिताः ॥ मकराद्याश्च ग-
ण्डाका गवयाश्च तथापराः ॥ महिषाद्याश्च ये चैव ते च
साधारणा मताः ॥१० ॥ कुररबकमकराः कङ्कचटकपिकभृङ्ग-
सारसाः॥आडिदात्यूहहंसा जलकरटिकपिङ्गलटिहिभाद्याश्च ११
जलेचरा विहङ्गास्त खञ्जरीटाश्च भासकाः ॥ १२ ॥ इत्येते
जलजा जीवाः स्थलजाः स्थलचारिणः ॥१३ ॥
शूकर, हरण, शल्ल अर्थात् साही आदि जीव पानीके आशयके आश्रित रहते हैं और
मकर, मच्छ आदि गेंडा, नीलगाय भैंसा आदि जीव साधारण माने हैं ॥ १० ॥ पपैवा,
बगला, मकरा, कंक, बत्तक, कोयल, भौंरा, सारस, आडीपक्षी, ढौंकरपक्षी, हंस,
शंखका जीव, रटिक, पिंगापक्षी, टिटिहरी आदि जलमें विचरनेवाले हैं, खंजरीट और भास-
पक्षी भी जलचारी हैं और स्थलमें विचरनेवाले स्थलचारी जीव कहाते हैं ॥ ११-१३ ॥
अथ ग्रामचारी पशुवर्ग ।
गजवाजिनस्तथोषूट्रा माहिषा सौरभौजकाः ॥ खरशूकरमेषाश्च
श्वानो मार्जारमूषकाः ॥ १४ ॥ इत्येते पशवो ज्ञेया ग्रामवास-
निवासिनः ॥
हस्ती, घोड़ा, ऊंट, भैंसा, बैल, बकरा, गधा, सुवर, मेढ़ा, कुत्ता, बिलाव, मूषा ॥ १४ ॥
ये सब जीव ग्राममें बसनेवाले हैं ॥
ग्रामचारी पक्षी ।
कुक्कुटकलविङ्कपारावतकपोतकाः ॥ १५ ॥
पक्षिणो ग्रामचाराश्च वच्मि चैषां गुणागुणम् ॥ १६ ॥
और मुर्गा, गौरैया, परेवा, कबूतर, ॥ १५ ॥ ये पक्षी ग्राममें विचरते हैं इनके गुण
और दोषको कहता हूं ॥ १६ ॥
हरिणोंके मांसका गुण ।
शृङ्गिणां हरिणः श्रेष्ठो बल्यो रोचनदीपनः ॥
त्रिदोषघ्नो लघुः पाके मधुरो ज्वरिणां हितः ॥ १७॥