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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 548 में से

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पृष्ठ 129

अ० १७] भाषाटीकासमेता । (९७)
नींबू कीड़ोंके समूहको नाशता है, तीक्ष्ण है, गरम है, पेटके कब्जको हरता है और वात,
पित्त, कफ इनके शूलवालोंको हित है और नष्ट अन्नमें रुचिको शोधता है ॥ १५ ॥ त्रिदोष
और तत्काल उपजे ज्वरसे पीड़ितको और दोषसे आश्रितोंको और पानी झरनेवालोंको और
विष्ठाके बन्धमें और बद्ध गुदरोगमें और विसूचिका अर्थात् हैजाके भेदमें हित है ऐसे मुनिजन
कहते हैं ॥ १६ ॥
अथ नारंगीका गुण ।
नारङ्गं स्वादु गुणोपपन्नं संदीपनं रोचकमर्शसां च ॥
त्रिदोषहच्छूलक्रिमीन्निहन्ति मन्दाग्निकासश्वसनापहारि ॥ १७॥
नारंगी फल स्वादु है, गुणवाला है, अग्निको जगाता है, बवासीरमें रुचिको उपजाता है
और त्रिदोष, शूल, कृमि, मंदाग्निरोग, खाँसी, श्वास इनको नाशता है ॥ १७ ॥
अथ इमलीका गुण ।
अपक्वमम्लीफलमम्लमस्ति तदस्रपित्तामकरं विदाहि ॥
वातामये शूलगदे प्रशस्तं पक्वं तथा शीतगुणोपपन्नम् ॥ १८ ॥
कच्ची इमली खट्टी होती है, वह रक्तपित्त और आमके रोगोंको उत्पन्न करती है तथा
विदाही होती है। पकी हुई इमलीका फल वातरोगमें और शूलमें श्रेष्ठ है और शीतल
होता है ॥ १८ ॥
अथ दाखका गुण ।
द्राक्षाफलं मधुरमम्लकषाययुक्तं क्षारेण पित्तमरुतां कफहारि
शीघ्रम् ॥श्रेष्ठं निहन्ति रुधिरामयदाहशोषमूर्च्छाज्वरश्वसनका-
सविनाशकारि ॥ १९ ॥ कषायन्ना विपाके च द्राक्षा चैव कफे
हिता ॥ २० ॥
दाख मधुर है, खट्टा है, कसैला है, खारेपनेसे पित्त, वात, कफ इनको शीघ्र हरता है, श्रेष्ठ
है और रक्तरोग, दाह, शोष, मूर्च्छा, ज्वर, श्वासरोग, खांसी इनको नाशता है ॥ १९ ॥ और
पाककालमें कसैलेपनेको नाशता है और कफमें हित है ॥ २० ॥
अथ नारियलका गुण ।
नालिकेरं सुमधुरं गुरु स्निग्धंच शीतलम् ॥ हृद्यं सबृंहणं बस्ति-
शोधनं रक्तपित्तनुत ॥ २१॥ विष्टम्भि पक्वं मतिमन्नपक्वं कफवा-
तलम् ॥ बृंहणं शीतलं वृष्यं नालिकेरफलं विदुः ॥ २२ ॥
नारियल मधुर है, भारी है, चिकना है, शीतल है, हृदयको हित है, धातुओंको पुष्ट करता है,
बस्तिको शोधता है, रक्तपित्तको नाशता है ॥ २१ ॥ विष्टंभी है ये सब पके हुए के गुण हैं,
हे बुद्धिमन् ! नहीं पका हुआ नारियल कफको और वातको करता है, धातुओंको बढ़ाता है,
शीतल है और वीर्यमें हित है ॥ २२ ॥
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