हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 115, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० १४ ] भाषाटीकासमेता । (८३)
अथ तेलकी विशेषता ।
सौवर्चलेङ्गुदीपीलुशिंशपासारसम्भवम् ॥ सरलागुरुदेवादिपाद-
पैः सम्भवं तु यत् ॥ १९ ॥ तुम्बुरुत्थं करञ्जोत्थं ज्योतिष्मत्युद्भवं
तथा ॥ अर्शःकुष्ठकृमिश्लेष्मशुक्रमेदोऽनिलापहम् ॥ २० ॥
करञ्जारिष्टके तिक्ते नात्युष्णेन विनिर्दिशेत् ॥ २१ ॥
काला नमक, हिङ्घोट, पीलू, सीसमका सार इनका तेल और सरलवृक्ष, अगर, देवदार इनका तेल
॥ १९ ॥ धनियांका तेल, करंजुआका तेल, मालकांगनीका तेल ये बवासीर, कुष्ठ, कृमिरोग,
कफ, वीर्य्य, मेद और वात इनको नाशते हैं ॥ २० ॥ करंजुआका तेल और नींवका तेल
अतिगरम नहीं कहा है ॥ २१ ॥
अथ स्वच्छ तिवसका तेल, आच्छोडका तेल, नारियलका
तेल तथा महुवाके तेलका गुण ।
कषायं मधुरं तिक्तं सारणं व्रणशोधनम् ॥
अच्छातिमुक्तकाच्छोडनालिकेरमधूकजम् ॥ २२ ॥
अतिशुद्ध तिवसका तेल, अच्छोडका तेल, नारियलका और महुवाका तेल कसैला है, मधुर
है, कडुआ है, दोषोंको दूर करता है, घावको शोधता है ॥ २२ ॥
अथ काकड़ी, खीरा, कोहला, लहेंसवा, पीलू इनके तेलका गुण।
त्रपुष्युर्वारूकूष्माण्डश्लेष्मातकपीलूद्भवम् ॥
वातपित्तहृदशोंघ्नं श्लेष्मलं गुरु शीतलम् ॥ २३ ॥
काकड़ी, खीरा, कुम्हड़ा, लहेसुवा, पीलू इनका तेल वात, पित्त और बवासीर इनको
नाशता है, कफको करता है, भारी है, शीतल है ॥ २३ ॥
अथ सालपर्णी और टेशूके तेलका गुण ।
पित्तश्लेष्मप्रशमनं श्रीपर्णीकिंशुकोद्भवम् ॥ २४ ॥
सालपर्णी और टेशूका तेल पित्तको और कफको नाशता है ॥ २४ ॥
अथ वसावर्ग ।
वसा मज्जा च वातघ्नी बलपित्तकफप्रदा ॥ सौकरी माहिषी वसा
वातला श्लेष्मवर्द्धनी ॥ २५ ॥ सर्पनकुलगौधेया व्रणकुष्ठघ्नी
विलेपनादेव॥ मत्स्यशिशुमारमकरग्राहादीनां वसाप्येवम् ॥ सा-