हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 204, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ें११८ . हम्मीररासो
चौपाई छंद
राणी कहै सुनो महरावं ।
ऐसे बचन उचित नहिं भावं ॥
या तन बचन सार स्रुति भाखै १ ।
तन मन धन दै बचन जु राखै २ ॥६६७॥
तन धन भ्रात पुत्र अरु नारी ।
हरि बिधु त्यागि बचन प्रतिपारी ॥
राज पाट अनित्य ३ सु जानो ।
रहै नित्य इक सुजस बखानो ॥६६८॥
केकइ ध्वज अधविग्रह दीनौ ।
बिद्या भवन जोति जस लीनौ ॥
भव जो कही सत्य वह जानो ।
और न होय कोटि बुधि ठानो ॥६६६॥
दोहरा छंद
'कब हठ करै अलावदी, रणतभँवर गढ़ आहि ।
कबै सेख सरणे रहै, बहुरौ ४ महिमा साहि ॥६७०॥
सूर सोच मन मैं करो ५, पदवी ६ लहौ न फोरि ।
जो हठ छंडो राव तुम, उतन लजै अजमेरि ॥६७१॥
सरण राखि सेख न तजो, तजो सीस गढ़ देस ।
राणी गव हमीर को ७, यह दीन्हौ उपदेस ॥६७२॥
छप्पय छंद
कहाँ पँवार जगदेव सीस आपन कर कट्यौ ।
कहाँ भोज बिक्रम सु राव जिन पर दुख मिट्यौ ।
१ भक्खै । २ रक्खै । ३ अनिच्च (त्य) । ४ बहुरचौ । ५ करै ।
६ पदई । ७ की ।
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri