हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११४ हम्मीररासो
वह$^१$ महिमा बर बीर राव का हुकम जु पावै ॥
गहै तुम्हें ततकाल पाँव लंगर गहि मेलै :
उसै दिल्ली बैठाय जोर मरजात सु-पेलै ।
हठ छाड़ि साहि रणथंभ का करो कूच चालिये दिली ।
जै रही राव हम्मीर की पतिसाही मारी गिली ।६४६॥
तब$^२$ सु साह हठ छाड़ि उलटि दिल्ली दिस आए ।
पिता बैर करि याद साह सुरजन पछिताए ॥
रतन पंच लै संग$^३$ साह कै पाँव सु लग्यौ ।
तात बैर हिय जानि कोप उर मैं अति जग्यौ ॥
कर जोरि साह सुरजन कहै सुगम दुग्ग मो हथ्थ गनि ।
यह जितो राज$^४$ रणधीर को मोहिं दैन की बाच भनि ।६४७॥
दोहरा छंद
हँसि हजरत ऐसे कही$^५$, सुरजन आगे$^६$ आव ।
दियौ राज रणधीर कौं, करूँ बड़ा उमराव ॥६४८॥
करि सलाँम सुरजन तबै, बीरा खायौ कोपि ।
आप$^७$ भवन हिकमति रची, स्वामि धर्म्म सब लोपि ॥६४९॥
जौरा भौंरा खास में$^८$, भरे जु कोरे चाँम ।
फजणि आनि हाजरि भयौ, सुरजव करी$^९$ सलाँम ॥६५०॥
हाथ$^{१०}$ जोरि हम्मीर सों, सुरजन कही सुजाँन ।
मिलो राव पतिसाह सों, गढ़ बीत्यौ$^{११}$ सामाँन ॥६५१॥
बिनती$^{१२}$ सुनत$^{१३}$ हमीर तब, कियौ कोपि रत नैन ।
छंडि टेक छत्री तनी, रे कपूत गनि$^{१४}$ ऐन ॥६५२॥
१ यह । २ तब अलाउदी छंडि हठ दिल्ली दिसि आए । ३ भेंट ।
४ राव हम्मीर को । ५ कहै । ६ अगु, अग्गै । ७ आय । ८ द्वै ।
९ किय । १० हथ्थ । ११ बित्यौ । १२ विनति । १३ सुनि । १४ गति ।
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