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गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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गुरुकुलम् इस दिशा में प्रयास कर रहा है। गुरुकुलम् एक ऐसा शिक्षा केंद्र है जो समग्रता में विचार कर भारतीय शिक्षा का प्रतिमान विकसित करने हेतु प्रयासरत हैं। विगत 22 वर्षों से कुलपति माननीय उत्तमभाई शाह के द्वारा अपने ही चार बच्चों के साथ यह प्रारंभ किया, और समाज में इस शिक्षा का विस्तार संभवतः 500 बच्चों तक पहुंच गया है। शिक्षा के क्षेत्र में विगत 7 वर्ष में अध्ययन, अनुसंधान, पाठ्यक्रम निर्माण आदि कार्य चल रहा है। इस कार्य के साथ-साथ परिवार शिक्षा, शिक्षक शिक्षा, विद्वानों, संघ, संस्था, एवं सभी धर्माचार्यों (संतो) का धूर्वीकरण के क्षेत्र में प्रयास चल रहे हैं।

शिक्षा को ठीक करने के कई प्रयास व्यक्तिगत स्तर पर हो रहे हैं। उसी प्रकार छोटे-छोटे पैमाने पर भी अनेकानेक प्रयास हो रहे हैं। ऐसे सभी प्रयासों को संकलित करने का प्रयास भी इस गुरुकुलम् द्वारा धूर्वीकरण के दौरान करना हैं।

आज भारतीय शिक्षा युरोपीय जीवनदृष्टि से पूर्ण रूप से ग्रस्त हो गई है। इसलिए भारतीय ज्ञानधारा का प्रवाह क्षीण हो गया है। भारतीय ज्ञानधारा आज अधिकृत नहीं मानी जाती है। परंतु वह सुरक्षित है देश के सामान्य जन के पास। यह सामान्य जन तुलना में अशिक्षित या कम शिक्षित है। वह पिछड़ा माना जाता है। उसका ज्ञान अधिकृत नहीं माना जाता क्योंकि उसके पास कोई प्रमाणपत्र नहीं है। ऐसे भारतीय ज्ञान को प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है ताकि समाज इससे लाभान्वित हो सकें।

आज शिक्षा से कोई भी संतुष्ट क्यों नहीं है? शिक्षा के बाजारीकरण से कौन से भीषण संकट पैदा हुए हैं? शिक्षित मनुष्य सुसंस्कृत भी होना चाहिए ऐसी अपेक्षा क्यों नहीं रखी जाती है? वर्तमान शिक्षा में किस प्रकार के परिवर्तन की आवश्यकता है? शिक्षा का दायित्व समाज का है या सरकार का? शिक्षा में उद्योगों की क्या भूमिका है? शिक्षा में सामान्य जन की क्या भूमिका है? क्या शिक्षा आज भी समाज के लिए लाभदायी हो सकती है?