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सर्वकोश
गुप्त अभिलेख संग्रह (जे. एफ. फ्लीट - गुप्त सम्राटों एवं परवर्ती नरेशों के ऐतिहासिक पाषाण व ताम्रलेख)

गुप्त अभिलेख संग्रह (जे. एफ. फ्लीट - गुप्त सम्राटों एवं परवर्ती नरेशों के ऐतिहासिक पाषाण व ताम्रलेख)

Inscriptions of the Early Gupta Kings by J.F. Fleet (CII Vol III)

जॉन फेथफुल फ्लीट (Corpus Inscriptionum Indicarum Vol III) द्वारा

DevanagariSanskritpublished691 पृष्ठ

पृष्ठ 575, कुल 691 में से

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पृष्ठ 575

Header and Marginal Inscriptions

Vol. III.
CORPUS INSCRIPTIONUM INDICARUM.
Plate xliv
Nirmand Plate of the Mahāsāmanta and Mahārāja Samudrasena.
W. GRIGGS, PHOTO-LITH.
J. F. FLEET, BO. C.S.
SCALE .50


Inscription Text (Nirmand Copper-Plate Inscription of Samudrasena)

[Line 1] ॐ स्वस्ति [। *] सर्व्वमङ्गलातिगः परममाहेश्वरो वरशक्तित्रयसम्पन्नः प्रालेयशैलप्रमथाधिप इव प्रति-
[Line 2] ष्ठितविशालविक्रमो महाराजवरसेनः [। *] तस्य पुत्रस्तत्पादानुद्ध्यातः परममाहेश्वरो महाराजसं-
[Line 3] जयसेनस्तस्य पुत्रस्तत्पादानुद्ध्यातो देव्यां प्रवालिकायामुत्पन्नः परममाहेश्वरो महाराज-
[Line 4] रविसैनस्तस्य पुत्रस्तत्पादानुद्ध्यातो देव्यां शिखरास्वामिन्यामुत्पन्नः परममाहेश्वरो महा-
[Line 5] सामन्तमहाराजसमुद्रसेनः कुशल्य्-ऐतत्कुशलवाशके स-समवायिनां सम्प्रति समु-
[Line 6] पस्थितान्विज्ञापयत्य्-अस्तु वो विदितम् यथास्माभिर्मङ्गलपुरे कपालिश्वराय भगवते पिना-
[Line 7] किने नूलुञ्छकपालिमुण्डसङ्घसंस्थानाय प्रतिपालयितव्याय त्रिदशपति-
[Line 8] कङ्कटनृत्तमुद्राधराय कण्ठभ्राजद्-व्यालभुजङ्गमकुण्डलावलम्बिने प्रा-
[Line 9] लेयशिखरशेखरधराय भगवते त्रिपुरविनाशनाय मिहिरलक्ष्मीस्वामि-
[Line 10] प्रतिपालिताय कायान्तर्-गतेन जननीदेव्या मिहिरलक्ष्म्या धर्मार्थम् अग्रहार-
[Line 11] सुल्लीसग्रामे सर्व्वप्रतिबन्धरहितं सर्व्वकरसमेतं पूर्व्वस्थित्या स-
[Line 12] कल्पितो दत्त इति [। *] एतज्-ज्ञात्वा न केनचित्प्रतिषेधः कर्त्तव्यः [। *]
[Line 13] अस्मद्वंशजैरन्यैर्वा दानमिदम्-अनुमोद्य परिपालनीयम् [। *] उक्तञ्च धर्म-
[Line 14] शास्त्रे [। *] बहुभिर्व्वसुधा भुक्ता राजभिः सगरादिभिः [। *] यस्य यस्य यदा भूमि-
[Line 15] स्तस्य तस्य तदा फलम् [॥ *] षष्टिं वर्षसहस्राणि स्वर्गे मोदति भूमिदः [। *]
[Line 16] आच्छेत्ता चानुमन्ता च तान्येव नरके वसेत् [॥ *] संवत्सरै ६ संवत् ६ द्वितीये वैशाख-
[Line 17] वदि द्वितीयायाम् [॥ *] दूतको ऽत्र कुलपुत्रकप्रमोदः [। *] लिखितं सन्धिविग्रहाधिकृता-
[Line 18] सिसमन्तेनेति [॥ *]


Royal Genealogy and Historical Commentary

Royal Genealogy:

  1. Mahārāja Varasena
  2. Mahārāja Sañjayasena (son of Varasena)
  3. Mahārāja Ravisena (son of Sañjayasena by Queen Pravālikā)
  4. Mahāsāmanta and Mahārāja Samudrasena (son of Ravisena by Queen Śikharasvāminī)
    Date of Record: Year 6 (saṁvat 6), second Vaiśākha, dark fortnight, 2nd tithi.
    Purpose of Grant: Donation of the village Sullīsa to the temple of the god Śiva (under the name of Kapāleśvara/Pinākin) at Maṅgalapura, instituted by the Queen-mother Mihiralakṣmī.
    Officials: The Dūtaka (executor) was the nobleman (Kulaputraka) Pramoda; inscribed by the Minister of Peace and War (Sandhivigrahādhikṛta) Asisamanta.