गुप्त अभिलेख संग्रह (जे. एफ. फ्लीट - गुप्त सम्राटों एवं परवर्ती नरेशों के ऐतिहासिक पाषाण व ताम्रलेख)

गुप्त अभिलेख संग्रह (जे. एफ. फ्लीट - गुप्त सम्राटों एवं परवर्ती नरेशों के ऐतिहासिक पाषाण व ताम्रलेख)
Inscriptions of the Early Gupta Kings by J.F. Fleet (CII Vol III)
जॉन फेथफुल फ्लीट (Corpus Inscriptionum Indicarum Vol III) द्वारा
DevanagariSanskritpublished691 पृष्ठ
पृष्ठ 477, कुल 691 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 477
...
कन्दर्प्प-प्रतिमो नृपः शमित-धीर् यस्य प्रभावार्ज्जितैः पुण्यैः प्राप्य महीम् अकण्टकतया शास्त्य् एव चक्रार्द्ध-भाक् [|*]
Then:
Line 5:
उत्सन्न-द्विषि तेन धाम भगवद्-वैकुण्ठयोर् आत्मना
श्रीमद्-बिम्बोत्थ-कान्त्या विहित-दिन-करे प्रेक्षणीये गुहायाम् [|*]
Line 6:
कान्तेऽद्भुत-विन्ध्य-भूधर-गुहा-गेहे समा-रोपयत् ॥
Wait, let's read the exact words of Line 5 and 6!
Line 5:
उत्सन्न-द्विषि तेन विग्रहवता धात्रावतार-च्छलात्
Wait, look at line 5:
उ त्स न्ने द्वि ष तै र्नि...
Let's look at the start of Line 5 in the photo:
उ त्स न्ने द्वि षि ते न धा म ज ग ताम् आ रा ध यि ष्णुं ह रिम्...
Wait, look at Line 5:
`उ त्स न्