गुप्त अभिलेख संग्रह (जे. एफ. फ्लीट - गुप्त सम्राटों एवं परवर्ती नरेशों के ऐतिहासिक पाषाण व ताम्रलेख)

गुप्त अभिलेख संग्रह (जे. एफ. फ्लीट - गुप्त सम्राटों एवं परवर्ती नरेशों के ऐतिहासिक पाषाण व ताम्रलेख)
Inscriptions of the Early Gupta Kings by J.F. Fleet (CII Vol III)
जॉन फेथफुल फ्लीट (Corpus Inscriptionum Indicarum Vol III) द्वारा
DevanagariSanskritpublished691 पृष्ठ
पृष्ठ 235, कुल 691 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 235CORPUS INSCRIPTIONUM INDICARUM. Plate iv
B.—Gadhwa Inscription of Chandragupta II. The Year 88.
C.—Gadhwa Inscription of Kumaragupta.
CORPUS INSCRIPTIONUM INDICARUM. Plate iv
Vol. III.
A.—Udayagiri Cave Inscription of Chandragupta II.
(Scale .14)
Text of Inscription A (Udayagiri Cave Inscription of the year 82):
[Line 1] सिद्धम् [॥] यस्यान्वग्-ज्योतिर्-अर्क-द्युति-धुरम् असकृत्-साधन-व्यग्र-कीर्त्तिर्
[Line 2] व्विश्वं व्यापि ज्वलन्त्या द्युति-समुदय-लब्धावकाश-प्रदीप्तं [।]
[Line 3] स श्री-चन्द्रगुप्त-प्रथितावदात-कीर्त्तिर्-ज्जयत्य्-अद्भुत-कर्म-कारी [॥]
[Line 4] सोढव्या यस्य नासीन्-नृप-वर-तरणोर्भूरि-सत्वावमर्द्दे
[Line 5] गुप्तेन प्राग्-उदञ्चो जयति परिभवात्-सर्व्व-राज्ञाम्-अजेयः [॥]
B.—Gadhwa Inscription of Chandragupta II. The Year 88.
[Line 1] ..... [प्र]तिष्ठापितस्य .....
[Line 2] ..... [परमभागवत-महाराजाधिराज-श्री-चन्द्रगुप्तस्य]
[Line 3] ..... [प्रवृद्धमान-विजय-राज्य-संवत्सरे] .....
[Line 4] ..... [अष्टा]शीत्युत्तरे ८० ८ .....
[Line 5] ..... [सदा]सत्रे .....
[Line 6] ..... [ब्राह्मणानां भोज]नाय .....
[Line 7] ..... दीनारा .....
[Line 8] ..... [दत्ता] .....
C.—Gadhwa Inscription of Kumaragupta.
[Line 1] [सिद्धम् ॥ कुमारगुप्तस्य] .....
[Line 2] ..... [परमभागवत-महाराजाधिराज-श्री-] .....
[Line 3] ..... कुमारगुप्तस्य प्रवर्द्धमान-[विजय-राज्य-] .....
[Line 4] ..... सत्रे ब्राह्मणानां .....
[Line 5] ..... भोजनाय .....
[Line 6] ..... दीनाराः .....
D.—Gadhwa Inscription of Kumaragupta. The Year 98.
[Line 1] [सिद्धम् ॥ संवत्सरे ९० ८] .....
[Line 2] ..... परमभागवत-महाराजाधिराज-श्री-कुमारगुप्तस्य .....
[Line 3] ..... [सदा]-सत्रे ब्राह्मण-भोजनाय .....
[Line 4] ..... दीनारा द्वादश १२ .....
[Line 5] ..... अक्षयनिवि-प्रदत्ता .....
[Line 6] ..... यः कश्चिद्-व्यतिक्रमं कुर्य्यात्-स पञ्चभिर्-महापातकैः .....