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सर्वकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

[ ११ ]
पद-सूचना | पृष्ठ-संख्या | पद-सूचना | पृष्ठ-संख्या
कहौ तुम्ह बिनु गृह .... १८० | कृपानिधान सुजान प्रानपति १७६
कहौ सो विपिन हैं .... १८४ | खेलन चलिये आनंदकंद .... ८३
करतराउ मनुमो अनुमान .... २४० | खेलि खेल सुखेलनिहारे .... ८६
कहै सुक सुनहि सिखावन सारो २४७ | खेलत बसंत राजाधिराज .... ४२५
कर-सर-धनु कटि रुचिर निषंग २७० | गये राम सग्न सेबको भलो ३४०
कहु कपि ! कब रघुनाथ .... ३०२ | गावें विबुध विमलबर बानी २७
कवहूँ, कपि राघव आवर्हिगे ? ३०३ | गीने मौनही बारहिबार .... ४३५
कपिके चलत सियको .... ३०६ | घर-घर अवध बधावने .... ३०
कपिके सुनि कल कोमल बैन ३१६ | चहत महामुनि जाग जयो ६१
करुनाकरकी करुना भई ३३५ | चले लेन लषन हनुमान हैं ... ३३३
कहो, क्यों न बिभीषतकी बनै? ३३६ | चरचा चरनिसों चरची .... ४३१
कब देखौंगी नयन .... ३४६ | चारय्यो भले बेटा .. १०३
कहु, कबहुं देखिहौं .... ३४७ | चित्रकूट अति बिचित्र .... २१७
काहेको खोरि कैकयिहि लावौं? २४३ | चुपिरि उबटि अन्हवाइकै ... ४२
काहेको मानत हानि हिये हौ ? २५५ | छंगन-मंगन-अंगना खेलत ६६
काहूसों काहू समाचार ऐसे पाए २६५ | छेमकरी ! बलि, बोलि सुबानी ३७४
कुंवर सांवरो री सजनी ! १८८ | छोटी-छोटी गोड़ियां, अंगुरियाँ ७४
कैसे पितु मातु .. १६७ | छोटिएँ धनुहियां, पनहियां .... ८७
कैकयी करी धौं चतुराई कौन? २६१ | जनकबिलोकिबारबार रघुवरको १२७
कैकेयी जौलौं जियति रही .... ४४१ | जब तें राम-लषन चितए, री १२८
कोसलरायके कुंअंरोटा .... १०७ | जबहि सब नृपति निरास भए १४७
कोसलपुरी सुहावनी .... ४१५ | जब दोउ दशरथ कुंवर बिलोके १४६
कीसिकके मखके रखवारे .... १०४ | जनक मुदित मन टूटत .... १५३
कैसिक कृपालहूको .... १११ | जयमाल जानकी जलजकर .... १५५
कौतुक ही कपि .... ३६४ | जब तें लै मुनि संग सिधाए ... १६१