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सर्वकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

पृष्ठ 71, कुल 360 में से

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पृष्ठ 71

६ गौतमधर्मसूत्राणि

तत्रापि नियमः—
वार्क्षं ब्राह्मणस्य माञ्जिष्ठहारिद्रे इतरयोः ॥ २० ॥
वृक्षकषायेण रक्तं वार्क्षम् । तद्ब्राह्मणस्य । मञ्जिष्ठया रक्तं माञ्जिष्ठम् । हरिद्रया रक्तं हारिद्रम् । ते इतरयोः । क्षत्रियवैश्ययोरिति यावत् ॥ २० ॥
ब्राह्मण (वर्ण के ब्रह्मचारी) का वस्त्र वृक्ष के कषाय से रंगा हुआ (होना चाहिए) और शेष दोनों वर्णों (क्षत्रिय और वैश्य वर्णों के ब्रह्मचारियों) का मंजीठी और हल्दी से रंगा हुआ (होना चाहिए) ॥ २० ॥

बैल्वपालाशौ ब्राह्मणदण्डौ ॥ २१ ॥
बैल्वः पालाशो वा ब्राह्मणस्य दण्डो न पुनः समुच्चितौ ॥ २१ ॥
ब्राह्मण (वर्ण के ब्रह्मचारी) का दण्ड बिल्व या पलाश का होना चाहिए ॥ २१ ॥

अश्वत्थपैलवौ शेषे ॥ २२ ॥
पीलुर्वृक्षविशेषः । उता (?) उता इति प्रसिद्धः । शेषे क्षत्रियवैश्यविषये ॥ २२ ॥
शेष (क्षत्रिय और वैश्य ब्रह्मचारियों) के दण्ड पीपल या पीलु का होना चाहिए ॥ २२ ॥

यज्ञियो वा सर्वेषाम् ॥ २३ ॥
सर्वेषामुक्तालाभे यज्ञियो यज्ञियवृक्षो वा दण्डः स्यात् ॥ २३ ॥
अथवा (उल्लिखित वृक्षों के दण्ड न मिलने पर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य) सभी ब्रह्मचारियों के दण्ड किसी यज्ञिय (यज्ञ में प्रयुज्य) वृक्ष के हो सकते हैं ॥ २३ ॥

अपीडिता यूपवक्राः सशल्काः ॥ २४ ॥
अपीडिताः कीटादिभिरदूषिताः । यूपवक्रा यूपवदग्रे वक्राः । सशल्काः सत्वचः । एवंविधा दण्डाः सर्वेषाम् ॥ २४ ॥
(दण्ड) कीड़ों आदि से अक्षत, यूप (यज्ञ के खूँटे) की तरह ऊपर वक्र और छाल से युक्त होना चाहिए ॥ २४ ॥

मूर्धललाटनासाग्रप्रमाणाः ॥ २५ ॥
यथासंख्यमत्रेष्यते । मूर्धप्रमाणो ब्राह्मणस्य दण्डः । ललाटावधिः क्षत्रियस्य । नासावधिर्वैश्यस्येति ॥ २५ ॥
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के दण्ड लम्बाई में) वर्णक्रमानुसार सिर