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सर्वकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 360 में से

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पृष्ठ 18

( १३ )

"उपनिषदो वेदान्तः सर्वच्छन्दःसु संहिता मधून्यघमर्षणमथर्वशिरो रुद्राः पुरुषसूक्तं राजतरौहिणे सामनी बृहद्रथन्तरे पुरुषगतिमहानाम्न्यो महावैराजं महादिवाकीर्त्यं ज्येष्ठसाम्नामन्यतमद् बहिष्पवमानं कूष्माण्डानि पावमान्यः सावित्री चेति पावमाननानि।"

इसी प्रकार वेदवेदांग और इतिहास पुराण का उल्लेख बहुश्रुत व्यक्ति का लक्षण बताते समय किया गया है :

"लोकवेदवेदाङ्गवित्" १. ८. ५।
"वाकोवाक्येतिहासपुराणकुशलः" १. ८. ६।

गौतमधर्मसूत्र ३. २. २८ में "दण्डो दमनादित्याहुः" कहकर निरुक्त ११. ३ की ओर भी संकेत किया गया है। इस प्रकार गौतमधर्मसूत्र में इतर साहित्य की भी पर्याप्त चर्चा है।

गौतमधर्मसूत्र का सामवेद से संबन्ध

गौतमधर्मसूत्र का सामवेद से घनिष्ठ संबन्ध है इस विषय में कोई विवाद नहीं है। इस सूत्र का अध्ययन विशेषतः सामवेद के अनुयायी करते थे। चरणव्यूह की टीका के अनुसार गौतम सामवेद की राणायनीशाखा के एक विभाग के आचार्य या शाखा के संस्थापक थे। सामवेद के श्रौतसूत्रों (लाट्यायन श्रौतसूत्र १. ३. ३, १. ४. १७ तथा द्राह्यायण श्रौतसूत्र १. ४. १७, ९. ३. १५) में गौतम का उल्लेख है। सामवेद के गृह्यसूत्र गोभिलगृह्यसूत्र ३. १०. ६ में भी गौतमधर्मसूत्र के नियम को प्रामाणिक माना गया है।

इन उल्लेखों के अतिरिक्त गौतमधर्मसूत्र का सामवेद से गहरा संबन्ध इस बात से भी प्रमाणित होता है कि इस सूत्र में सामवेद के अनेक विषय ग्रहण किये गये हैं। उदाहरण के लिए गौतमधर्मसूत्र के अध्याय २६ में कुछ सूत्र ऐसे हैं जो शब्दशः सामवेद के सामविधान ब्राह्मण से उद्धृत किये गये हैं। इसी प्रकार गौतमधर्मसूत्र के तृतीय प्रश्न, प्रथम अध्याय के १२ वें सूत्र में सामवेद के ९ मन्त्रों का निर्देश किया गया है। ये मन्त्र किसी अन्य शाखा के धर्मसूत्र में नहीं उल्लिखित हैं जिससे गौतमधर्मसूत्र का सामवेद के प्रति पक्षपात स्पष्टतः दिखाई पड़ता है। गौतमधर्मसूत्र में प्रथम अध्याय के सूत्र ५२ में पाँच व्याहृतियाँ गिनायी गयी हैं और ये व्याहृति साम से उद्धृत हैं, गौतमधर्मसूत्र के अतिरिक्त अन्य शाखा के सूत्रों में पाँच के स्थान पर तीन या सात व्याहृतियों का ही उल्लेख है। गौतमधर्मसूत्र की यह विशेषता भी सामवेद के साथ इसका घनिष्ठ संबन्ध प्रकट करती है।

अतः यह प्रतीत होता है कि गौतम की शाखा का संबन्ध सामवेद से था, यद्यपि वैदिक काल की इस प्राचीन शाखा के विषय में कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्राचीन साहित्य में क्षेपकों के लिए पर्याप्त अवसर था और किसी ग्रन्थ का विशुद्ध रूप निर्धारित करना असंभव सा ही है।