गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Gautama Dharmasutra Hindi
महर्षि गौतम द्वारा
स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 146, कुल 360 में से
संदर्भ में पढ़ेंसानुवाद-मिताक्षरावृत्तिसहितानि ८१
संभाष्य पुण्यकृतो मनसा ध्यायेत् ॥ १८ ॥
यदि कारणवशात्तैः सह संभाषेत ततः पुण्यकृतो वसिष्ठादीन्मनसा ध्यायेत् । मनसेति ध्यानस्वभावानुवादः ॥ १८ ॥
यदि किसी कारण से संभाषण करे तो उसके बाद ( वसिष्ठ आदि ) पुण्यात्माओं का मन से ध्यान करे ॥ १८ ॥
ब्राह्मणेन वा सह संभाषेत ॥ १९ ॥
प्रकरणाद्ब्राह्मणोऽपि पुण्यकृदेव ॥ १९ ॥
अथवा ( म्लेच्छादि से कारणवश भाषण करने के बाद ) ब्राह्मण से संभाषण करे ॥ १९ ॥
अधेनुं धेनुन्भव्येति ब्रूयात् ॥ २० ॥
धेनुः पयस्विनी गौः । अधेनुस्तद्विपरीता । तामपि धेनुर्भव्येति ब्रूयान्न पुनरधेनुरिति ॥ २० ॥
दूध न देनेवाली गायको 'धेनुभव्या' ( भविष्य में दूध देने वाली ) कहे ॥ २० ॥
अभद्रं भद्रमिति ॥ २१ ॥
अभद्रमपि वस्तु भद्रमित्येव ब्रूयात् ॥ २१ ॥
अभद्र ( वस्तु ) को भी भद्र कहे ॥ २१ ॥
कपालं भगालमिति ॥ २२ ॥
कपालं ब्रुवन्भगालमिति ब्रूयात् ॥ २२ ॥
कपाल को 'भगाल' कहे ॥ २२ ॥
मणिधनुरितीन्द्रधनुः ॥ २३ ॥
इन्द्रधनुरिति ब्रुवन्मणिधनुरिति ब्रूयात् ॥ २३ ॥
इन्द्रधनु कहना हो तो 'मणिधनु' कहे ॥ २३ ॥
गां धयन्तीं परस्मै नाऽऽचक्षीत ॥ २४ ॥
धेट् पाने । व्यत्ययेनायं कर्मणि कर्तृप्रत्ययः । वत्सेन धीयमानां गां परस्मै स्वामिने न ब्रूयात् । यस्य हविषे वत्सा अपाकृता धयेयुरित्यादिके निमित्ते त्वाख्यातव्यमेव संसृष्टां च वत्सेनेत्यापस्तम्बीये विशेषात् ॥ २४ ॥
६ गौ० ध०