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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

-२. ११५ ] परिकर्मव्यवहारः [ ३५
गुणव्युत्कलितस्योदाहरणम्—
चतुरादिद्विगुणात्मकोत्तरयुतो गच्छश्चतुर्णां कृतिर्
दश वाञ्छापदमङ्कसिन्धुरगिरिद्रव्येन्द्रियाम्भोधयः ।
कथय व्युत्कलितं फलं सकलसङ्ख्याग्रिमं व्योमवान्
करणस्कन्धवनान्तरं गणितविन्मत्तेभविक्रीडितम् ॥११५॥
इति परिकर्मविधावष्टमं व्युत्कलितं समाप्तम् ॥
इति सारसंग्रहे गणितशास्त्रे महावीराचार्यस्य कृतौ परिकर्मनामा प्रथमो व्यवहारः समाप्तः ॥
१ M प्रा. ।
गुणोत्तर श्रेढि सम्बन्धी व्युत्कलित पर प्रश्न
क्रमबद्ध गुच्छेवाले वृक्षों के फलों की संकलन क्रिया में ४ प्रथमपद है, २ प्रचय है, पदों की
संख्या १६ है जब कि इष्ट भाग में पदों की संख्या क्रमशः १०, ९, ८, ७, ६, ५ और ४ है । हे जंगली
हस्तियों द्वारा क्रीड़ित वन के अंतस्थल रूपी व्यावहारिक गणित की क्रियाओं के वेधक ! बतलाओ कि
कथित विभिन्न उत्तम वृक्षों के शेष फलों की कुल संख्या क्या है ? ॥११५॥
इस प्रकार, परिकर्म व्यवहार में व्युत्कलित नामक परिच्छेद समाप्त हुआ ।
इस प्रकार, महावीराचार्य की कृति सारसंग्रह नामक गणित शास्त्र में परिकर्म नामक प्रथम
व्यवहार समाप्त हुआ ।
(११५) इस प्रश्न में भिन्न-भिन्न ७ फलों के वृक्ष हैं जिनमें से प्रत्येक में फलों के १६ गुच्छे हैं ।
प्रत्येक वृक्ष में सबसे छोटा गुच्छा ४ फलों वाला है; बड़े-बड़े गुच्छों में गुणोत्तर श्रेढि में बढ़ते हुए फलों
की संख्याएँ हैं, जिसकी साधारण निष्पत्ति २ है । ७ वृक्षों में से हटाये हुए गुच्छों की संख्या नीचे से
क्रमशः १०, ९, ८, ७, ६, ५ और ४ है । यहाँ विभिन्न उत्तम वृक्षों पर शेष फलों की कुल संख्या
निकालना है । 'मत्तेभवि क्रीडितं' जो इस सूत्र में आया है, उसी सूत्र का छन्द ( metre ) है
जिसमें कि वह संरचित किया गया है । इसका अर्थ वन्यहस्तियों की क्रीड़ा भी होता है ।