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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 79, कुल 421 में से

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पृष्ठ 79

)->( भङ्ग )`

  • करते हैं, जब कि सब पदों को संवादरूप से ( correspondingly ) बढ़ाने के लिये प्रथम पद
  • को एक द्वारा बढ़ा हुआ मान लिया जाय ॥८१॥ मिश्रधन को विश्लेषित करने की विधि इस प्रकार है—
  • मिश्रधन को मन से चुने हुए प्रथम पद और पदों की संख्या द्वारा ह्रासित करते हैं और तब उत्तर-
  • मिश्रधन को भङ्ग करने वाले नियम को इस अंतर में प्रयुक्त करने पर प्रचय प्राप्त होता है ॥८२॥
  • उदाहरणार्थ प्रश्न
  • ४० में क्रमशः २, ३, ५ और १० जोड़कर आदि मिश्रधन और अन्य मिश्रधन बनाते हैं । मुझे
  • बतलाओ कि इन दशाओं में प्रथम पद, प्रचय, पदों की संख्या और कुल तीनों, क्रमशः क्या-क्या होंगे ? ॥८३॥
  • ( दृष्ट ) ज्ञात योग से दी हुई समान्तर श्रेढि का प्रथम पद और प्रचय, द्वितीय श्रेढि के प्रथम पद
  • और प्रचय; जहाँ मन से चुना हुआ योग दी हुई श्रेढि के ज्ञात योग का दुगुना, तिगुना, आधा, तिहाई
  • `अथवा इसी तरह का गुणक अथवा भिन्नीय रूप है, निम्नलिखित