गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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)->( भङ्ग )`
करते हैं, जब कि सब पदों को संवादरूप से ( correspondingly ) बढ़ाने के लिये प्रथम पदको एक द्वारा बढ़ा हुआ मान लिया जाय ॥८१॥ मिश्रधन को विश्लेषित करने की विधि इस प्रकार है—मिश्रधन को मन से चुने हुए प्रथम पद और पदों की संख्या द्वारा ह्रासित करते हैं और तब उत्तर-मिश्रधन को भङ्ग करने वाले नियम को इस अंतर में प्रयुक्त करने पर प्रचय प्राप्त होता है ॥८२॥उदाहरणार्थ प्रश्न४० में क्रमशः २, ३, ५ और १० जोड़कर आदि मिश्रधन और अन्य मिश्रधन बनाते हैं । मुझेबतलाओ कि इन दशाओं में प्रथम पद, प्रचय, पदों की संख्या और कुल तीनों, क्रमशः क्या-क्या होंगे ? ॥८३॥( दृष्ट ) ज्ञात योग से दी हुई समान्तर श्रेढि का प्रथम पद और प्रचय, द्वितीय श्रेढि के प्रथम पदऔर प्रचय; जहाँ मन से चुना हुआ योग दी हुई श्रेढि के ज्ञात योग का दुगुना, तिगुना, आधा, तिहाई- `अथवा इसी तरह का गुणक अथवा भिन्नीय रूप है, निम्नलिखित