गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंॐ
महावीराचार्यप्रणीतः
गणितसारसंग्रहः
१. संज्ञाधिकारः
मङ्गलाचरणम्
अलङ्घ्यं त्रिजगत्सारं यस्यानन्तचतुष्टयम् । नमस्तस्मै जिनेन्द्राय महावीराय तायिने ॥ १ ॥
संख्याज्ञानप्रदीपेन जैनेन्द्रेण महौ१त्विषा । प्रकाशितं जगत्सर्वं येन तं प्रणमाम्यहम् ॥ २ ॥
२प्रीणितः प्राणिसस्यौघो३ निरीतिर्निरवग्रहः । श्रीमतामोघवर्षेण येन स्वेष्टहितैषिणा ॥ ३ ॥
पापरूपाः परा यस्य चित्तवृत्तिहविर्भुजि । भस्मसाद्४भावमीयुस्तेऽवन्ध्यकोपोऽभवै५त्ततः ॥ ४ ॥
वशीकुर्वन् जगत्सर्वं स्वयं नानुवशः परैः । नाभिभूतः प्रभुरतस्मादपूर्वमकरध्वजः ॥ ५ ॥
६यो विक्रमक्रमाक्रान्तचं७क्रिचक्रंकृतक्रियः । चक्रिकाभञ्जनो नाम्ना चक्रिकाभञ्जनोऽ८ञ्जसा ॥ ६ ॥
१ MB मह्° । २ M प्रणीतः । ३ M सर्गौ° । ४ MK सद्धां । ५ KPB भवेत् । ६ B योऽयं ।
७ M क्री° । ८ MB ज्ञ° ।
१. संज्ञा ( पारिभाषिक शब्द ) अधिकार
मङ्गलाचरण
जिन्होंने तीनों लोकों में सारभूत एवं मिथ्या दृष्टियों द्वारा अलंघ्य अनन्त दर्शन, अनन्त ज्ञान,
अनन्त वीर्य और अनन्त सुख नामक अनन्त चतुष्टय को प्राप्त किया, ऐसे रक्षक जिनेन्द्र भगवान् महावीर
को मैं नमस्कार करता हूँ ॥ १ ॥ मैं महान् विभूति को प्राप्त जिनेन्द्र को नमन करता हूँ जिन्होंने संख्या-
ज्ञान के प्रदीप से समस्त विश्व को प्रकाशवान किया है ॥ २ ॥ धन्य हैं वे अमोघवर्ष (अर्थात् वे जो
वास्तव में उपयोगी वृष्टि की वर्षा करते हैं, ) जो हमेशा अपने प्रियपात्रों के हितचिन्तन में रहते हैं और
जिनके द्वारा प्राणी तथा वनस्पति, महामारी और दुर्भिक्ष आदि से मुक्त होकर सुखी हुए हैं ॥ ३ ॥
जिन ( अमोघवर्ष ) के चित्त की क्रियायें अग्निपुंज सदृश होकर समस्त पापरूपी वैरियों को भस्म में
परिणत करने में सफल हैं, और जिनका क्रोध व्यर्थ नहीं जाता ॥ ४ ॥ जिन्होंने समस्त संसार को अपने
वश में कर लिया है और जो किसी के वश में न रहकर शत्रुओं द्वारा पराजित नहीं हो सके हैं, अपूर्व
मकरध्वज की तरह शोभायमान हैं ॥ ५ ॥ जिनका कार्य, अपने पराक्रम द्वारा पराभूत राजाओं के चक्र
( समूह ) द्वारा होता है, और जो न केवल नाम से चक्रिका भंजन हैं वरन् वास्तव में भी चक्रिका
भंजन ( अर्थात् जन्म और मरण के चक्र के नाशक १ ) हैं ॥ ६ ॥ जो अनेक ज्ञान सरिताओं के अधिष्ठाता
१ भविष्य की अपेक्षा से ।