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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 343, कुल 421 में से

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पृष्ठ 343

८ गणितसारसंग्रह
शब्द | सामान्य अर्थ | संख्या अभिधान | उद्गम
यति | मुनि Sage | ७ | मुनि देखिए ।
रजनीकर | चंद्रमा The Moon | १ | इन्दु देखिए ।
रत्न | त्रयनिधि Trinity | ३ | जिनागम में मोक्ष का मार्ग सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान,
| | | और सम्यक्चारित्र का एक होना बतलाया गया है, जिन्हें
| | | तीन रत्न भी निरूपित किया गया है ।
रत्न | मूल्यवान पत्थर A pre- | ९ | नव प्रकार के रत्न माने गये हैं : वज्र, वैडूर्य, गोमेद,
| cious gem | | पुष्पराग, पद्मराग, मरकत, नील, मुक्ता, प्रवाल ।
रन्ध्र | छिद्र Opening | ९ | मानव शरीर में नव मुख्य रन्ध्र होते हैं ।
रस | स्वाद Taste | ६ | मुख्य रस छः हैं : मधुर, अम्ल, लवण, कटुक,
| | | तिक्त, कषाय ।
रुद्र | शिव का नाम Name | ११ | मृड देखिए ।
| of a Deity | |
रूप | आकार Form or | १ | प्रत्येक वस्तु का केवल एक रूप होता है ।
| shape | |
लब्ध | नव शक्तियों की प्राप्ति | ९ | नव लब्धियाँ निम्नलिखित हैं : अनन्त दर्शन, अनन्त-
| Attainment of | | ज्ञान, क्षायिक सम्यक्त्व, क्षायिक चारित्र, क्षायिक दान,
| nine powers | | क्षायिक लाभ, क्षायिक भोग, क्षायिक उपभोग, क्षायिक
| | | वीर्य । ये कर्मों के क्षय से क्षायिक भाव के रूप प्राप्त
| | | होते हैं ।
लब्धि | Attainment | ९ | लब्ध देखिए ।
लेख्य | | ६ |
लोक | World | ३ | भुवन देखिए ।
लोचन | आँख The eye | २ | अक्षि देखिए ।
वर्ण | | ६ | जिनागम में वर्ण के पांच प्रकार हैं : कृष्ण, नील, पीत,
| | | रक्त और श्वेत ।
वसु | वैदिक देवताओं की एक | ८ | ये देवता संख्या में आठ होते हैं ।
| जाति A class of | |
| Vedic deities | |
वह्नि | अग्नि Fire | ३ | अग्नि देखिए ।
वारण | हाथी Elephant | ८ | इभ देखिए ।
वार्धि | समुद्र Ocean | ४ | अब्धि देखिए ।
विधु | चंद्रमा The moon | १ | इन्दु देखिए ।
विषधि | समुद्र Ocean - | ४ | अब्धि देखिए ।
विषनिधि | " | " | "