गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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पट्टिका के माप को प्राप्त करने के लिए, निम्नलिखित नाम वाले वृक्षों से प्राप्त लकड़ियों के संबंध
२६८ ] गणितसारसंग्रहः [ ८. ६५-
हस्ताङ्गुलवर्गेण क्राकचिके पट्टिकाप्रमाण स्यात् ।
शाकाह्वयद्रुमादिद्रुमेषु परिणाहदैर्घ्यहस्तानाम् ॥ ६५ ॥
संख्या परस्परघ्ना मार्गाणां संख्यया गुणिता ।
तत्पट्टिकासमाप्ता क्रकचकृता कर्मसंख्या स्यात् ॥ ६६ ॥
शाकार्जुनाम्लवेतससरलासितसर्जडुण्डुकाख्येषु ।
श्रीपर्णीप्लक्षाख्यद्रुमेष्वमीष्वेकमार्गस्य ।
षण्णवतिरङ्गुलानामायामः किष्कुरेव विस्तारः ॥ ६७ १/२ ॥
अत्रोद्देशकः
शाकाख्यतरौ दीर्घः षोडश हस्ताश्च विस्तारः ।
सार्धत्रयश्च मार्गाश्चाष्टौ कान्यत्र कर्माणि ॥ ६८ १/२ ॥
इति खातव्यवहारे क्रकचिकाव्यवहारः समाप्तः ।
इति सारसंग्रहे गणितशास्त्रे महावीराचार्यस्य कृतौ सप्तमः खातव्यवहारः समाप्तः ॥
पट्टिका के माप को प्राप्त करने के लिए, निम्नलिखित नाम वाले वृक्षों से प्राप्त लकड़ियों के संबंध
में प्रत्येक दशा में मार्ग १ होता है, लंबाई ९६ अंगुल होती है, और चौड़ाई १ किष्कु होती है; उन
वृक्षों के नाम ये हैं—शाक, अर्जुन, अम्लवेतस, सरल, असित, सर्ज और डुण्डुको, तथा श्रीपर्णी
और प्लक्ष ॥ ६७-६७ १/२ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
किसी शाक लकड़ी के टुकड़े के संबंध में लंबाई १६ हस्त है, चौड़ाई ३ १/२ हस्त है और मार्ग
(अर्थात् चीरने वाले आरे के रास्तों की) संख्या ८ है । यहाँ आरे के काम के कितने एकक
(इकाइयाँ) कर्म (कार्य) पूर्ण हुआ है ? ॥ ६८ १/२ ॥
इस प्रकार खात व्यवहार में क्रकचिका व्यवहार नामक प्रकरण समाप्त हुआ । इस प्रकार महा-
वीराचार्य की कृति सारसंग्रह नामक गणितशास्त्र में खातव्यवहार नामक सप्तम व्यवहार समाप्त हुआ ।
विशेष एकक (इकाई) द्वारा मापा जाता है । यह एकक पट्टिका कहलाता है । पट्टिका लंबाई में ९६
अंगुल और चौड़ाई में १ किष्कु अथवा ४२ अंगुल होती है । यह सरलता पूर्वक देखा जा सकता है
कि इस प्रकार पट्टिका ७ वर्ग हाथ के बराबर होती है ।