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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 316, कुल 421 में से

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पृष्ठ 316

२६२ गणितसारसंग्रहः [ ८, ४१½-
समचतुरश्रा वापा नवहस्तघना नगस्य तले ।
अङ्गुलविस्ताराङ्गुलखाताङ्गुलयुगलदीर्घजलधारा ॥ ४१½ ॥
पतिताग्रे विच्छिन्ना वापीमुखसंस्थितान्तरालजलैः ।
सम्पूर्णा स्याद्वापी गिर्युत्सेधो जलप्रमाणं किम् ॥ ४२½ ॥
इति खातव्यवहारे सूक्ष्मगणितम् सम्पूर्णम् ।
चितिगणितम्
इतः परं खातव्यवहारे चितिगणितमुदाहरिष्यामः । अत्र परिभाषा—
हस्तो दीर्घो व्यासस्तदर्धमङ्गुलचतुष्कमुत्सेधः ।
दृष्टस्तथेष्टकायास्ताभिः कर्माणि कार्याणि ॥ ४३½ ॥
इष्टक्षेत्रस्य खातफलानयने च तस्य खातफलस्य इष्टकानयने च सूत्रम्—
मुखफलमुदयेन गुणं तदिष्टिकागणितभक्तलब्धं यत् ।
चितिगणितं तद्विद्यात्तदेव भवतीष्टकासंख्या ॥ ४४½ ॥
किसी पर्वत की तली में समभुज चतुर्भुज छेदवाला एक ऐसा कुआँ है जिसका तीनों विमितियों
में विस्तार ९ हस्त है । पर्वत के शिखर से एक ऐसी जलधारा बहती है, जो समांग रूप से तली में
१ अंगुल चौड़ी, १ अंगुल ढालू खात तलों पर, और दो अंगुल लंबाई में शिखर पर रहती है । ज्योंही
जलधारा कुएँ में गिरना प्रारंभ करती है, त्योंही शिखर पर जलधारा टूट जाती है । उतनी जलधार से
वह कुआँ पूरी तरह भर जाता है । पर्वत की ऊँचाई क्या है ? और पानी का प्रमाण क्या है ?
॥ ४१½-४२½ ॥
इस प्रकार खात व्यवहार में सूक्ष्म गणित नामक प्रकरण समाप्त हुआ ।
चिति गणित ( ईंटों के ढेर संबंधी गणित )
इसके पश्चात् हम खात व्यवहार में चिति गणित का वर्णन करेंगे । यहाँ इष्टका ( ईंट ) के
एकक ( इकाई ) संबंधी परिभाषा यह है—
(एकक) ईंट, लंबाई में एक हस्त, चौड़ाई में उसकी आधो, और मुटाई में ४ अंगुल होती है ।
ऐसी ईंटों के साथ समस्त क्रियाएँ की जाती हैं ॥ ४३½ ॥
किसी क्षेत्र में दिये गये खात की घनाकार समाई, तथा उक्त घनाकार समाई की संवाही ईंटों
की संख्या निकालने के लिये नियम—
खात के मुख का क्षेत्रफल, गहराई द्वारा गुणित किया जाता है । परिणामी गुणनफल को इकाई
ईंट के घनफल द्वारा भाजित किया जाता है । इस प्रकार प्राप्त भजनफल, ईंट के ढेर का ( घनफल )
माप समझा जाता है । वही भजनफल ईंटों की संख्या का माप होता है ॥ ४४½ ॥
(४४½) यहाँ ईंट के ढेर का घनफल माप स्पष्टतः इकाई ईंट के पदों में दिया गया है ।