गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 300, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें२४६ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. २१४½-
अत्रोद्देशकः
समचतुरश्रस्य त्रिकबाहुप्रतिबाहुकस्य चान्यस्य ।
कोटिः पञ्च द्वादश भुजास्य किं वा बहिर्वृत्तम् ॥ २१४½ ॥
बाहू त्रयोदश मुखं चत्वारि धरा चतुर्दश प्रोक्ता ।
द्विसमचतुरश्रबाहिर्विष्कम्भः को भवेदत्र ॥ २१५½ ॥
पञ्चकृतिर्वदनभुजाश्चत्वारिंशच्च भूमिरैकोना ।
त्रिसमचतुरश्रबाहिर्वृत्तव्यासं ममाचक्ष्व ॥ २१६½ ॥
व्येका चत्वारिंशद्बाहुः प्रतिबाहुको द्विपञ्चाशत् ।
षष्टिर्भूमिर्वदनं पञ्चकृतिः कोऽत्र विष्कम्भः ॥ २१७½ ॥
त्रिसमस्य च षड् बाहुस्त्रयोदश द्विसमबाहुकस्यापि ।
भूमिर्दश विष्कम्भावनयोः कौ बाह्यवृत्तयोः कथय ॥ २१८½ ॥
बाहू पञ्चत्र्युत्तरदशकौ भूमिश्चतुर्दशो विषमे ।
त्रिभुजक्षेत्रे बाहिरवृत्तव्यासं ममाचक्ष्व ॥ २१९½ ॥
द्विकबाहुषडश्रस्य क्षेत्रस्य भवेद्विचिन्त्य कथय त्वम् ।
बाहिरविष्कम्भं मे पैशाचिकमत्र यदि वेत्सि ॥ २२०½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
( समबाहु चतुर्भुज ) वर्गाकृति के संबंध में, जिसकी प्रत्येक भुजा ३ है, और अन्य चतुर्भुज क्षेत्र
के संबंध में, जिसकी लंब भुजा ५ और क्षैतिज भुजा १२ है, बतलाओ कि परिगत वृत्त के व्यास के
माप क्या-क्या हैं ? ॥ २१४½ ॥ दो पार्श्व भुजाओं में से प्रत्येक माप में १३ है, ऊपरी भुजा ४ है, और
आधार माप में १४ है । इस दशा में ऐसे दो समान भुजाओं वाले चतुर्भुज क्षेत्र के परिगत वृत्त के व्यास
का माप बतलाओ ॥ २१५½ ॥ ऊपरी भुजा और दो बाजू की भुजाओं में से प्रत्येक माप में २५ है ।
आधार माप में ३९ है । यहाँ बतलाओ की ऐसे तीन बराबर भुजाओं वाले चतुर्भुज के परिगत वृत्त के
व्यास का माप क्या है ? ॥ २१६½ ॥ पार्श्व भुजाओं में से किसी एक का माप ३९ है; दूसरी का
माप ५२ है; आधार का माप ६० और ऊपरी भुजा का माप २५ है । इस चतुर्भुज क्षेत्र के संबंध में
परिगत वृत्त का व्यास क्या है ? ॥ २१७½ ॥ किसी समभुज त्रिभुज की भुजा का माप ६ है, और
समद्विबाहु त्रिभुज की भुजा का माप १३ है । इस दशा में आधार का माप १० है । इन त्रिभुजों के
परिगत वृत्तों के व्यासों के मान निकालो ॥ २१८½ ॥ विषम त्रिभुज के संबंध में दो भुजाएँ माप में
१५ और १३ हैं; आधार का माप १४ है । उसके परिगत वृत्त के व्यास का मान मुझे बतलाओ
॥ २१९½ ॥ यदि तुम गणित की पैशाचिक विधियाँ जानते हो, तो ठीक तरह सोचकर बतलाओ कि
जिसकी प्रत्येक भुजा का माप २ है ऐसे नियमित षट्भुजाकार आकृतिवाले क्षेत्र के परिगत वृत्त के
व्यास का मान क्या होगा ? ॥ २२०½ ॥
(२२०½) इस गाथा पर लिखी गई कन्नड़ी टीका में प्रश्न को यह सूचित कर हल किया है कि
नियमित षट्भुज का विकर्ण परिगत वृत्त के व्यास के तुल्य होता है ।