गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४० ] गणितसारसंग्रहः [ ७. १९०½-
स्तम्भस्योन्नतप्रमाणसंख्यां ज्ञात्वा तस्मिन् स्तम्भे येनकेनचित्कारणेन भग्ने पतिते सति
तत्तम्भाग्रमूलयोर्मध्ये स्थितौ भूसंख्यां ज्ञात्वा तत्तस्तम्भमूलादारभ्य स्थितपरिमाणसंख्यानयन-
स्य सूत्रम् —
निर्गमवर्गान्तरमितिवर्गविशेषस्य यद्भवेदर्धम् ।
निर्गमनेन विभक्तं तावत्स्थित्वाथ भग्नः स्यात् ॥ १९०½ ॥
अत्रोद्देशकः
स्तम्भस्य पञ्चविंशतिरुरुच्छ्रायः कश्चिदन्तरे भग्नः ।
स्तम्भाग्रमूलमध्ये पञ्च स गत्वा कियान् भग्नः ॥ १९१½ ॥
वेणूच्छ्राये हस्ताः सप्तकृतिः कश्चिदन्तरे भग्नः ।
भूमिश्च सैकविंशतिरस्य स गत्वा कियान् भग्नः ॥ १९२½ ॥
वृक्षोच्छ्रायो विंशतिरग्रस्थः कोऽपि तत्फलं पुरुषः ।
कर्णीकृत्य व्यक्षिपदथ तरुमूलस्थितः पुरुषः ॥ १९३½ ॥
तस्य फलस्याभिमुखं प्रतिभुजरूपेण गत्वा च ।
फलमग्रहीच्च तत्फलनरयोर्गतियोगसंख्यैव ॥ १९४½ ॥
पञ्चाशद्भूत्तत्फलगतिरूपा कर्णसंख्या का ।
तद्वृक्षमूलगतनरगतिरूपा प्रतिभुजापि कियती स्यात् ॥ १९५½ ॥
का संख्यात्मक मान निकालने के लिये यह नियम है—
संपूर्ण ऊँचाई के वर्ग और ज्ञात आधारीय ( basal ) दूरी के वर्ग के अंतर की अर्द्ध राशि जब
संपूर्ण ऊँचाई द्वारा भाजित होती है, तब शेष उन्नत भाग का माप उत्पन्न होता है । जो अब संपूर्ण
ऊँचाई का शेष बचता है वह भग्न भाग का माप होता है ॥ १९०½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
स्तंभ की ऊँचाई २५ हस्त है । वह मूल और अग्र के बीच कहीं टूटा है । फर्श पर गिरे हुए
अग्र ( ऊपरी भाग ) और स्तंभ के मूल के बीच की दूरी ५ हस्त है । बताओ कि टूटने का स्थान बिन्दु
मूल से कितनी दूर है ? ॥ १९१½ ॥ ( उगने वाले ) बाँस की ऊँचाई का माप ४९ हस्त है । वह मूल
और अग्र के बीच कहीं भग्न हुआ है । आधारीय दूरी २१ हस्त है । वह मूल से कितनी दूरी पर टूटा
है ॥ १९२½ ॥ किसी वृक्ष की ऊँचाई २० हस्त है । कोई मनुष्य उसके ऊपरी भाग ( चोटी ) पर
बैठकर कर्णरूप पथ में फल को नीचे फेंकता है ( अर्थात् वह फल सरल रेखा में गिरकर, समकोण
त्रिभुज का कर्ण बनाता है ) । तब दूसरा मनुष्य जो वृक्ष के नीचे बैठा हुआ है, फल तक सरल रेखा में
पहुँचता है ( यह पथ त्रिभुज की दूरी भुजा का निर्माण करता है ), और उस फल को ले लेता है ।
फल तथा इस मनुष्य द्वारा तय की गई दूरियों का योग ५० हस्त है । फल द्वारा तय किये गये पथ
द्वारा निरूपित कर्ण का संख्यात्मक मान क्या है ? मनुष्य द्वारा तय किये गये पथ द्वारा निरूपित अन्य
भुजा का माप क्या हो सकता है ? ॥ १९३½-१९५½ ॥