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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 291, कुल 421 में से

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पृष्ठ 291

–७. १८२½ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ २३७
अत्रोद्देशकः
षोडशहस्तोच्छ्रायौ स्तम्भाववनिश्च षोडशोद्दिष्टौ ।
आबाधान्तरसंख्यामत्राप्यवलम्बकं ब्रूहि ॥ १८१½ ॥
स्तम्भैकस्योच्छ्रायः षट्त्रिंशद्विंशतिर्द्वितीयस्य ।
भूमिर्द्वादश हस्ताः काबाधा कोऽयमवलम्बः ॥ १८२½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
दिये गये स्तंभ की ऊँचाई १६ हस्त है । उस आधार की लम्बाई जो उन दो बिन्दुओं के
बीच की होती है, जहाँ धागे भूमि को स्पर्श करते हैं, १६ हस्त देखी गई है । इस दशा में आधार के
खंडों (आबाधाओं) और अंतरावलम्बक के संख्यात्मक मानों को निकालो ॥ १८१½ ॥ एक स्तंभ की
ऊँचाई ३६ हस्त है, दूसरे की २० हस्त है । आधार रेखा की लम्बाई १२ हस्त है । आबाधाओं और
अंतरावलम्बक के माप क्या-क्या हैं ? ॥ १८२½ ॥ दो स्तंभ क्रमशः १२ और १५ हस्त हैं, उन दो

(१८०½) आकृति में यदि अ और ब स्तम्भों की ऊँचाइयाँ
हों, स स्तंभों के बीच का अंतर हो, और म और न क्रमशः एक
स्तम्भ के मूल से लेकर, भूमि को स्पर्श करने वाले, दूसरे स्तम्भ के
अग्र से फैले हुए धागे के भूमिस्पर्श बिन्दु तक की लम्बाईयाँ हों,
तो नियमानुसार,
स₁ = { अ/(स + न) ÷ (अ (स + म) + ब (स + न))/((स + म) (स + न)) } × (स + म + न) ;
स₂ = { ब/(स + म) ÷ (अ (स + म) + ब (स + न))/((स + म) (स + न)) } × (स + म + न) ; जहाँ स₁ और स₂
सम्पूर्ण आधार के खण्ड हैं ।
और प = स₁ × ब/(स + म), अथवा स₂ × अ/(स + न), जहाँ प अन्तरावलम्बक है । इस आकृति
में सजातीय त्रिभुजों पर विचार करने पर यह ज्ञात होगा कि—
स₂/प = (स + न)/अ और स₁/प = (स + म)/ब ।
इन निष्पत्तियों से हमें स₁/स₂ = (अ (स + म))/(ब (स + न)) प्राप्त होता है;
∵ स₁/(स₁ + स₂) = (अ (स + म))/(अ (स + म) + ब (स + न)) , ∴ स₁ = (अ (स + म) (स + म + न))/(अ (स + म) + ब (स + न)) ;
क्योंकि स₁ + स₂ = स + म + न;
इसी प्रकार, स₂ = (ब (स + न) (स + म + न))/(अ (स + म) + ब (स + न)) ∴ और प = स₂ × अ/(स + न) = स₁ × ब/(स + म) ।