गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 278, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें२२४ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. १४९-
अत्रोद्देशकः
सूक्ष्मधनं सप्तेष्टं त्रिकं हि बीजे द्विके त्रिके दृष्टे ।
द्विसमचतुरश्रबाहु मुखभूम्यवलम्बकान् ब्रूहि ॥ १४९ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
दिये गये क्षेत्रफल का ठीक माप ७ है, मन से चुना हुआ गुणकार ३ है, और दत्त बीज २
और ३ हैं। दो बराबर भुजाओं वाले चतुर्भुज क्षेत्र को बराबर भुजाओं, ऊपरी भुजा, आधार और
लंब के मानों को प्राप्त करो ॥१४९॥
नोट—आकृतियों के माप अनुमाप ( scale ) रहित हैं ।
सबसे पहिले इस अध्याय की ९० १/२ वीं गाथानुसार दिये गये बीजों की सहायता से आयत की
रचना करते हैं । उस आयत की छोटी भुजा का माप ५
और बड़ी भुजा का माप १२ तथा कर्ण का माप १३ होता
है । उसका क्षेत्रफल मान में ६० होता है । अब इस
प्रश्न में दिये गये क्षेत्रफल को प्रश्न में दी गई मन से चुनी
हुई संख्या के वर्ग द्वारा गुणित करते हैं, जिससे हमें
७ × ३² = ६३ प्राप्त होता है । इस ६३ में से हमें दिये
गये बीजों से संरचित आयत का क्षेत्रफल ६० घटाना
पड़ता है, जिससे ३ शेष प्राप्त होता है । ३ क्षेत्रफल वाला
एक आयत बनाना पड़ता है, जिसकी एक भुजा बीजों
से प्राप्त आयत की बड़ी भुजा के बराबर होती है । यह
बड़ी भुजा माप में १२ है, इसलिये इस आयत की छोटी
भुजा आकृति में दिखलाये अनुसार १/४ के माप की होती है ।
बीजों से प्राप्त आयत के दो भाग कर्ण द्वारा प्राप्त करते
हैं, जो दो त्रिभुज होते हैं । इन दो त्रिभुजों को, आकृति
में दिखाये अनुसार, १/४ × १२ क्षेत्रफल वाले आयत के दोनों
ओर जमाते हैं, ताकि लंबी भुजाएँ संपाती हों ।
इस प्रकार अंत में हमें दो बराबर १३ मापवाली
भुजाओं का चतुर्भुज प्राप्त होता है, जिसकी ऊपरी भुजा
१/४ और आधार १० १/४ होता है । इसकी सहायता से
प्रश्न में इष्ट चतुर्भुज की भुजाओं के माप, मन से चुनी हुई
संख्या ३ द्वारा, भुजाओं के माप १३, १/४, १३ और
१० १/४ को भाजित कर, प्राप्त कर सकते हैं ।