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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 276, कुल 421 में से

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पृष्ठ 276

२२२ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. १४३-
अत्रोद्देशकः
स्वान्तःपुरे नरेन्द्रः प्रासादतले निजाङ्गनामध्ये ।
दिव्यं स रत्नकम्बलमपीपतत्तच्च समवृत्तम् ।। १४३ ।।
ताभिर्देवीभिर्धृतमेभिर्भुजयोश्च मुष्टिभिर्लब्धम् ।
पञ्चदशैकस्याः स्युः कति वनिताः कोऽत्र विष्कम्भः ।। १४४ ।।
समचतुरश्रभुजाः के समत्रिबाहौ भुजाश्चात्र ।
आयतचतुरश्रस्य हि तत्कोटिभुजौ सखे कथय ।। १४५ ।।
क्षेत्रफलसंख्यां ज्ञात्वा समचतुरश्रक्षेत्रानयनस्य चायतचतुरश्रक्षेत्रानयनस्य च सूत्रम्—
सूक्ष्मगणितस्य मूलं समचतुरश्रस्य बाहुरिष्टहृतम् ।
धनमिष्टफले स्यातामायतचतुरश्रकोटिभुजौ ।। १४६ ।।
उदाहरणार्थ प्रश्न
किसी राजा ने अपने अंतःपुर के प्रासाद में अपनी रानियों के बीच में ऊपर से फर्श पर समवृत्त
आकार वाला उत्कृष्ट रत्नकंबल नीचे गिराया । वह उन देवियों द्वारा हाथ में ग्रहण कर लिया गया ।
उनमें से प्रत्येक ने अपनी दोनों भुजाओं की मुष्टियों में पंद्रह, पंद्रह दंड क्षेत्रफल का कंबल
ग्रहण कर रखा । यहाँ बतलाओ कि इस नरेन्द्र की वनितायें कितनी हैं, और वृत्ताकार कंबल का
व्यास ( विष्कंभ ) कितना है ? यदि यह कंबल वर्गाकार हो, तो इसकी प्रत्येक भुजा कितने माप की
होगी ? यदि वह समत्रिभुजाकार हो तो उसकी भुजा कितनी होगी ? हे मित्र, मुझे बतलाओ
कि यदि कंबल आयताकार हो, तो उसकी लंब भुजा और आधार का माप क्या होगा ? ॥१४३-१४५॥
वर्गाकार आकृति अथवा आयताकार आकृति प्राप्त करने के लिये नियम, जबकि आकृति के क्षेत्रफल
का संख्यात्मक मान ज्ञात हो—
दिये गये क्षेत्रफल के शुद्ध माप का वर्गमूल इष्ट वर्गाकार आकृति की भुजा का माप होता है ।
दिये गये क्षेत्रफल को मन से चुनी हुई ( केवल क्षेत्रफल के वर्गमूल को छोड़कर ) कोई भी राशि
द्वारा भाजित करने पर परिणामी भजनफल और यह मन से चुनी हुई राशि आयत क्षेत्र के संबंध में
क्रमशः आधार और लंब भुजा की रचना करती हैं ॥१४६॥
वृत्त की दशा में, (क × म) / (क × न) = π अ² / (२π अ) , जहाँ π = परिधि / व्यास ;
वर्ग की दशा में, (क × म) / (क × न) = अ² / ४अ ;
समत्रिभुज की दशा में, (क × म) / (क × न) = (अ² / २) / ३अ
आयत की दशा में, (क × म) / (क × न) = (अ × ब) / (२(अ + ब)) , जहाँ ब = अ / २ लिया गया है ।
अध्याय की ७ वीं गाथा में दिये गये नियम के अनुसार समभुजत्रिभुज के क्षेत्रफल का व्यावहारिक
मान यहाँ उपयोग में लाया गया है । अन्यथा, इस नियम में दिया गया सूत्र ठीक सिद्ध नहीं होता ।
(१४३-१४५) इस प्रश्न में मुट्ठीभर का अर्थ चार अंगुल प्रमाण होता है ।