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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 274, कुल 421 में से

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पृष्ठ 274

२२० ] गणितसारसंग्रहः [ ७. १३८-
अत्रोद्देशकः
द्विसमत्रिभुजक्षेत्रद्वयं तयोः क्षेत्रयोःसमं गणितम् ।
रज्जू समे तयोःस्यात् को बाहुः का भवेद्भूमिः ॥ १३८ ॥
द्विसमत्रिभुजक्षेत्रे प्रथमस्य धनं द्विसंगुणितम् ।
रज्जुः समा द्वयोरपि को बाहुः का भवेद्भूमिः ॥ १३९ ॥
द्विसमत्रिभुजक्षेत्रे द्वे रज्जुर्द्विगुणिता द्वितीयस्य ।
गणिते द्वयोःसमाने को बाहुः का भवेद्भूमिः ॥ १४० ॥
द्विसमत्रिभुजक्षेत्रे प्रथमस्य धनं द्विसंगुणितम् ।
द्विगुणा द्वितीयरज्जुः को बाहुः का भवेद्भूमिः ॥ १४१ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
दो समद्विबाहु त्रिभुज हैं। उनका क्षेत्रफल एक सा है। उनकी परिमितियाँ भी बराबर हैं।
भुजाओं और आधारों के मान क्या क्या हैं ? ॥ १३८ ॥ दो समद्विबाहु त्रिभुज हैं। पहिले का क्षेत्रफल
दूसरे के क्षेत्रफल से दुगुना है। उन दोनों की परिमितियाँ एक सी हैं। भुजाओं और आधारों के मान
क्या क्या हैं ? ॥ १३९ ॥ दो समद्विबाहु त्रिभुज हैं। दूसरे त्रिभुज की परिमिति पहिले त्रिभुज की
परिमिति से दुगुनी है। उन दो त्रिभुजों के क्षेत्रफल बराबर हैं। भुजाओं और आधारों के माप क्या क्या
हैं ? ॥ १४० ॥ दो समद्विबाहु त्रिभुज दिये गये हैं। प्रथम त्रिभुज का क्षेत्रफल दूसरे के क्षेत्रफल से
दुगुना है, और दूसरे की परिमिति पहिले की परिमिति से दुगुनी है। भुजाओं और आधारों के
माप क्या क्या हैं ? ॥ १४१ ॥
इष्ट तत्त्वों को प्राप्त कर सकते हैं । इस अध्याय की १०८½ वीं गाथा के अनुसार, इन बीजों से
निकाली गई भुजाओं और ऊँचाइयों के मापों को जब क्रमशः परिमितियों की निष्पत्ति में पाई जाने
वाली राशियों अ और ब द्वारा गुणित करते हैं, तब दो समद्विबाहु त्रिभुजों की इष्ट भुजाओं और ऊँचाइयों
के माप प्राप्त होते हैं । वे निम्नलिखित हैं—
( १ ) बराबर भुजा = अ × { ( ६ब²स / अ²द )² + ( २ब²स / अ²द - १ )² } ......,
आधार = अ × २ × २ × ( ६ब²स / अ²द ) × ( २ब²स / अ²द - १ ) ......,
ऊँचाई = अ × { ( ६ब²स / अ²द )² - ( २ब²स / अ²द - १ )² } ......।
( २ ) बराबर भुजा = ब × { ( ४ब²स / अ²द + १ )² + ( ४ब²स / अ²द - २ )² } ......,
आधार = ब × २ × २ × ( ४ब²स / अ²द + १ ) × ( ४ब²स / अ²द - २ ) ......,
ऊँचाई = ब × { ( ४ब²स / अ²द + १ )² - ( ४ब²स / अ²द - २ )² } ......।
अब इन अर्हाओं (मानों) से सरलतापूर्वक सिद्ध किया जा सकता है कि परिमितियों की निष्पत्ति
अ : ब और क्षेत्रफलों की निष्पत्ति स : द है, जैसा कि आरम्भ में ले लिया गया था ।