गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें-७. १०३½ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ २०९
विषमचतुरश्रक्षेत्रस्य मुखभूभुजालम्बकर्णाबाधाधनानयनसूत्रम्—
ज्येष्ठाल्पान्योन्यहीनश्रुतिहतभुजकोटी भुजे भूमुखे ते
कोट्योरन्योन्यदोर्भ्यां हतयुतिरथ दोर्घातयुक्तकोटिघातः ।
कर्णाल्पश्रुतिघ्नावर्नाधकभुजकोट्याहृतौ लम्बकौ ता-
बाबाधे कोटिदोर्णाववनिविवरके कर्णघातार्धमर्थः ॥ १०३½ ॥
विषम चतुर्भुज के संबंध में, ऊपरी भुजा, आधार, बाजू की भुजाओं, ऊपरी भुजा के अंतों से
आधार पर गिराये गये लम्बों, कर्णों, आधार के खंडों और क्षेत्रफल के मापों को निकालने के लिये नियम —
दिये गये बीजों के दो कुलकों ( sets ) संबंधी दो आयताकार प्राप्त चतुर्भुज क्षेत्रों के बड़े
और छोटे कर्णों से आधार और ( उन्हीं प्राप्त छोटी और बड़ी आकृतियों की ) लम्ब भुजा क्रमशः
गुणित की जाती हैं। परिणामी गुणनफल इष्ट चतुर्भुज क्षेत्र की दो असमान भुजाओं, आधार और
ऊपरी भुजा के मापों