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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 421 में से

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पृष्ठ 207

-६. २४१ ] मिश्रकव्यवहारः [ १५३
अत्रोद्देशकः
वैश्यैः पञ्चभिरेकं पोट्टलकं दृष्टमाह चैकैकः ।
पोट्टलकषष्ठसप्तमनवमाष्टमदशमभागमाप्त्वैव ॥२३९॥
स्वस्वकरस्थेन सह त्रिगुणं त्रिगुणं च शेषाणाम् ।
गणक त्वं मे शीघ्रं वद हस्तगतं च पोट्टलकम् ॥२४०॥
इष्टांशेष्टगुणपोट्टलकानयनसूत्रम्—
इष्टगुणान्नान्यांशाः सेष्टांशाः सैकनिजगुणहृता युक्ताः ।
द्यूनपदघ्नेष्टांशन्यूनाः सैकेष्टगुणहृता हस्तगताः ॥२४१॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
पाँच व्यापारियों ने एक थैली देखी । उन्होंने (एक के बाद दूसरे से) इस प्रकार कहा कि
थैली की रकम का क्रमशः १/६, १/७, १/९, १/८ और १/१० भाग पाने पर वह अपने हाथ की रकम मिलाकर अन्य
व्यापारियों के कुल धन से तिगुना धनी हो जायगा । हे गणितज्ञ ! उनके हाथों की अलग-अलग रकम
तथा थैली में भरी हुई रकम को शीघ्र ही बतलाओ ॥२३९-२४०॥
थैली की रकम प्राप्त करने के लिये नियम, जब कि उल्लिखित भिन्नीय भागों को, क्रमशः
उन व्यक्तियों के हाथ की रकम जोड़ने पर, प्रत्येक अन्य की कुल रकमों के मान से विशिष्ट गुणा
धनी बन जावे—
(इष्ट मनुष्य के भाग को छोड़कर,) शेष सभी से सम्बन्धित उल्लिखित भिन्नीय भागों को
साधारण हर में प्रहासित कर हर को उपेक्षित कर दिया जाता है । इन्हें (अलग-अलग दृष्ट मनुष्य
सम्बन्धी) निर्दिष्ट अपवर्त्य (multiple) द्वारा गुणित करते हैं । इन गुणनफलों में उस दृष्ट मनुष्य
के भिन्नीय भाग को जोड़ते हैं । परिणामी योगों में से प्रत्येक को अलग-अलग उसके संगत उल्लिखित
अपवर्त्य (multiple) से एक अधिक राशि द्वारा भाजित करते हैं । तब इन भजनफलों को भी
जोड़ा जाता है । अलग-अलग दशाओं सम्बन्धी इस प्रकार प्राप्त योगों को, दो कम दशाओं की संख्या
द्वारा गुणित कर, निर्दिष्ट भिन्नीय भाग द्वारा हासित करते हैं । अन्तर को एक अधिक निर्दिष्ट अपवर्त्य
द्वारा भाजित करते हैं । यह फल (इस विशिष्ट दशा में) हाथ की रकम है ॥२४१॥
( २४१ ) नियम में दिया गया सूत्र इस प्रकार है—
क = { (अ + मब)/(न + १) + (अ + मस)/(य + १) + (अ + मद)/(र + १) + ... - (श - २) अ } ÷ (म + १)
ख = { (ब + नअ)/(म + १) + (ब + नस)/(य + १) + (ब + नद)/(र + १) + ... - (श - २) ब } ÷ (न + १) इत्यादि;
जहाँ क, ख, ............ हाथ की रकमें हैं; अ, ब, स, द भिन्नीय भाग हैं;
म, न, य, र, ............ विभिन्न अपवर्त्य संख्यायें हैं; और श व्यापार सम्बन्धी व्यक्तियों की
संख्या है ।
ग० सा० सं०-२०