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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 421 में से

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पृष्ठ 197

-६. २०८ ] मिश्रकव्यवहारः [ १४३

अत्रोद्देशकः

कश्चिद्वणिक् फलार्थी षोडशवर्णं शतद्वयं कनकम् ।
यत्किंचिद्विनिमयकृतमेकाद्यं द्विगुणितं यथा क्रमशः ॥२०४॥
द्वादशवसुनवदशकक्षयकं लाभो द्व्युत्तरशतम् ।
शेषं किं स्याद्विनिमयकांस्तेषां चापि मे कथय ॥२०५॥
दृश्यसुवर्णविनिमयसुवर्णमूलानयनसूत्रम्-
विनिमयवर्णेनाप्तं स्वांशं स्वेष्टक्षयघ्नसंमिश्रात् ।
अंशक्यौनेनाप्तं दृश्यं फलमत्र भवति मूलधनम् ॥२०६॥

अत्रोद्देशकः

वणिजः कंचित् षोडशवर्णकसौवर्णगुलकमाहृत्य ।
त्रिचतुःपञ्चमभागान् क्रमेण तस्यैव विनिमयं कृत्वा ॥२०७॥
द्वादशदशवर्णैः संयुज्य च पूर्वशेषेण । मूलेन विना दृष्टं स्वर्णसहस्रं तु किं मूलम् ॥२०८॥

उदाहरणार्थ प्रश्न

कोई व्यापारी लाभ प्राप्त करने का इच्छुक है, और उसके पास १६ वर्ण वाला २०० भार का
स्वर्ण है । उसका एक भाग, १२, ८, ९ और १० वर्ण वाले चार प्रकार के स्वर्ण से बदला जाता है,
जिनके भार ऐसे अनुपात में हैं जो १ से आरम्भ होकर नियमित रूप से २ द्वारा गुणित किये जाते हैं ।
इस बदले के व्यापार के फलस्वरूप स्वर्ण के भार में १०२ लाभ होता है । शेष ( बिना बदले हुए )
स्वर्ण का भार क्या है ? उन उपर्युक्त वर्णों के संगत ( corresponding ) स्वर्ण-प्रकारों के भारों
कोभी बतलाओ, जो बदले में प्राप्त हुए हैं ॥२०४-२०५॥

जिसका कुछ भाग बदला गया है ऐसे स्वर्ण की सहायता से, और बदले के कारण बढ़ता देखा
गया है ऐसे स्वर्ण के भार की सहायता से स्वर्ण की मूल मात्रा के भार को निकालने के लिये नियम-

बदले जाने वाले मूल स्वर्ण के प्रत्येक विशिष्ट भाग को उसके बदले के संगत वर्ण द्वारा
भाजित किया जाता है । प्रत्येक दशा में, परिणामी भजनफल दिये गये मूल स्वर्ण के मन से गुने
हुए वर्ण द्वारा गुणित किये जाते हैं; और तब ये सब गुणनफल जोड़े जाते हैं । इस योग में से मूल,
स्वर्ण के विभिन्न भिन्नीय बदले हुए भागों के योग को घटाया जाता है । अब यदि बदले के कारण
स्वर्ण के भार की बढ़ती को इस परिणामी शेष द्वारा भाजित किया जाय, तो मूल स्वर्ण धन प्राप्त
होता है ॥२०६॥

उदाहरणार्थ प्रश्न

किसी व्यापारी की १६ वर्ण सोने की एक छोटी गेंद ली जाती है; तथा उसके १/३, १/४ और १/५
भाग क्रमशः १२, १० और ९ वर्ण वाले स्वर्ण से बदल दिये जाते हैं । इन बदले हुए विभिन्न प्रकार
के स्वर्णों के भारों को मूल स्वर्ण के शेष भाग में जोड़ दिया जाता है । तब मूल स्वर्ण के भार को
लेखा में से हटाने से भार में १००० बढ़ती देखी जाती है । इस मूल स्वर्ण का भार बतलाओ
॥२०७-२०८॥