गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
पृष्ठ 144, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 144९० ] गणितसारसंग्रहः [ ५. ४२-
९० ] गणितसारसंग्रहः [ ५. ४२-
सप्तराशिक उद्देशकः
त्रिचतुर्व्यासायामौ श्रीखण्डावर्हतोऽष्टहेमानि ।
षण्णवविस्तृतिदैर्घ्या हस्तेन चतुर्दशात्र कति ॥ ४२ ॥
इति सप्तराशिकः ।
नवराशिक उद्देशकः
पञ्चाष्टत्रिव्यासद्दैर्ध्योद्याम्भो धत्ते वापी शालिनी वाहषट्कम् ।
सप्तन्यासा हस्ततः षष्टिदैर्घ्याः पात्सेधोः किं नवाचक्ष्व विद्वन् ।। ४३ ।।
इति सारसंग्रहे गणितशास्त्रे महावीराचार्यस्य कृतौ त्रैराशिको नाम चतुर्थव्यवहारः ॥
१ ४३ वें श्लोक के सिवाय K और B में निम्नलिखित श्लोक प्राप्य है-
द्वयष्टाशीतिव्यासद्दैर्ध्योन्नताम्भो धत्ते वापी शालिनी सार्धवाहौ ।
हस्तादष्टायामकाः षोडशोच्छ्राः षट्कव्यासाः किं चतस्रा वद त्वम् ॥
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सप्तराशिक पर उदाहरणार्थ प्रश्न
जिनमें प्रत्येक का व्यास ३ हस्त और लम्बाई ( आयाम ) ४ हस्त है, ऐसे संदल-लकड़ी के
दो टुकड़ों का मूल्य ८ स्वर्ण मुद्राएं हैं। इस अर्घ से, जिनमें प्रत्येक ६ हस्त व्यास में और ९ हस्त
लम्बाई में है ऐसे संदल-लकड़ी के १४ टुकड़ों का क्या मूल्य होगा ? ॥४२॥
नवराशिक पर उदाहरणार्थ प्रश्न
जो चौड़ाई, लम्बाई और ( तली से ) ऊंचाई में क्रमशः ५, ८ और ३ हस्त है ऐसी किसी घर
की वापिका में ६ वाह पानी भरा है। हे विद्वान् ! बतलाओ कि ७ हस्त चौड़ी, ६० हस्त लम्बी
और तली से ५ हस्त ऊँचो ९ वापिकाओं में कितना पानी समावेगा ? ॥४३॥
इस प्रकार सप्तराशिक और नवराशिक प्रकरण समाप्त हुआ ।
इस प्रकार महावीराचार्य की कृति सारसंग्रह नामक गणित शास्त्र में त्रैराशिक नामक चतुर्थ
व्यवहार समाप्त हुआ ।
(४३) इस गाथा में 'शालिनी' शब्द का अर्थ "घर की" होता है । यह उस छंद का भी नाम है
जिसमें यह गाथा संरचित हुई है ।