गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२ ] गणितसारसंग्रहः [ ३. ७४-
अत्रोद्देशकः
नवकदशैकादशहृतराशीनां नवतिनवशतीभक्ता । त्र्यूनाशीत्यष्टशती संयोगः केंऽशकाः कथय ॥७४॥
छेदोत्पत्तौ सूत्रम्—
रूपांशकराशीनां रूपाद्यास्त्रिगुणिता हराः क्रमशः ।
द्वित्र्यंशाभ्यस्तावादिमचरमौ फले रूपे ॥७५॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
९, १० और ११ द्वारा क्रमशः विभाजित की गई कुछ संख्याओं का योग ८७७ भाजित ९९०
है । बतलाओ कि भिन्नों को जोड़ने की इस क्रिया में अंश क्या क्या हैं ? ॥७४॥
चाहे हुए हरों को निकालने के लिये नियम—
‘एक’ अंश वाली विभिन्न भिन्नीय राशियों का योग जब ‘एक’ हो, तब चाहे हुए हर एक से
आरम्भ होकर क्रमवार, उत्तरोत्तर ३ से गुणित किये जाते हैं, इस तरह प्राप्त प्रथम और अंतिम हर फिर
से क्रमशः २ और २/३ द्वारा गुणित किये जाते हैं ॥७५॥
प्रत्येक दिये गये हरों के सम्बन्ध में अंश को एक मानकर तथा भिन्नों को