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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 101, कुल 421 में से

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पृष्ठ 101

-३. ५३ ] कलासवर्णव्यवहारः [ ४७
अत्रोद्देशकः
पादोत्तरं दलास्यं पदं त्रिपादांशकःसमुद्दिष्टः । स्वेष्टं चतुर्थभागः किं व्युत्कलितं समांकलय ॥४८॥
प्रभवोऽर्धं पञ्चांशः प्रचयो द्वित्र्यंशको भवेदृच्छः । पञ्चाष्टांशःस्वेष्टं पदमृणमाचक्ष्व गणितज्ञ ॥४९॥
आदिश्चतुर्थभागः प्रचयः पञ्चांशकस्त्रिपञ्चांशः ।
गच्छो वाञ्छागच्छो दशमो व्यवकलितमानं किम् ॥५०॥
त्रिभागौ द्वौ वक्त्रं पञ्चमांशश्चयःस्यात् पदं त्रिघ्नः पादः पञ्चमःस्वेष्टगच्छः ।
षडंशःसप्तांशो वा व्ययः को वद त्वं कलावास प्रज्ञाचन्द्रिकाभास्वदिन्दो ॥५१॥
द्वादशपदं चतुर्थणोत्तरमर्धोनपञ्चकं वदनम् । त्रिचतुःपञ्चाष्टेष्टपदानि व्युत्कलितमाकलय ॥५२॥
गुणसंकलितव्युत्कलितोदाहरणम् ।
द्वित्रिभागरहिताष्टमुखं द्वित्र्यंशको गुणचयोऽष्ट पदं भोः ।
मित्र रत्नगतिपञ्चपदानीष्टानि शेषमुखवित्तपदं किम् ॥५३॥
इति भिन्नव्युत्कलितं समाप्तम्³ ।
१ M च चतुर्थागः ।
२ M किं व्युत्कलितं समाकलय ।
३ K और M में इसके पश्चात् "इति सारसङ्ग्रहे महावीराचार्यस्य कृतौ द्वितीयव्यवहारस्समाप्तः"
जोड़ा गया है । यह वास्तव में भूल प्रतीत होती है ।
उदाहरणार्थ प्रश्न
दी हुई श्रेढि में प्रचय ¼ है, प्रथमपद ½ है, पदों की संख्या ¾ है और चुनी हुई पदों की
(हटाई जाने वाली) संख्या ¼ है । ऐसी श्रेढि की शेष श्रेढि का योग निकालो ॥४८॥ समान्तर
श्रेढि के सम्बन्ध में प्रथमपद ½ है, प्रचय ⅕ है और पदों की संख्या ⅔ है । यदि हटाये जाने वाले
पदों की संख्या ⅝ है तो हे गणितज्ञ, शेष श्रेढि का योगफल बताओ ॥४९॥ दी हुई श्रेढि में प्रथमपद
¼ है, प्रचय ⅕ है और पदों की संख्या ⅗ है । यदि चुनी हुई पदों की संख्या १/१० हो तो शेष श्रेढि का
योगफल बतलाओ ॥५०॥ प्रथमपद ⅔ है, प्रचय ⅕ है, पदों की संख्या ¾ है और चुनी गई पदों
की संख्या ⅕, ⅙ अथवा ⅐ है । हे चंद्रमा के प्रकाश रूपी बुद्धि से चमकते हुए चंद्रमा कि भांति कला
के वास ! मुझे बतलाओ कि शेष पदों की संख्या का योग क्या होगा ? ॥५१॥ दी हुई श्रेढि के पदों
की संख्या १२ है, प्रचय - ¼ (ऋण ¼) है और प्रथमपद ४½ है तथा चुनी गई पदों की संख्याएं
क्रमशः ३, ४, ५ अथवा ८ हैं । शेष पदों की संख्या का योगफल अलग-अलग निकालो ॥५२॥
गुणोत्तर श्रेढि में व्युत्कलित् का उदाहरणार्थ प्रश्न
प्रथमपद ७⅓ है, साधारण निष्पत्ति ⅔ है और पदों की संख्या ८ है । चुनी हुई पदों की
संख्याएं क्रमशः ३, ४, ५ हैं । बतलाओ कि शेष श्रेढियों के सम्बन्ध में प्रथमपद, योग और पदों की
संख्या क्या-क्या हैं ? ॥५३॥
इस प्रकार, कलासवर्ण व्यवहार में, भिन्न व्युत्कलित् नामक परिच्छेद समाप्त हुआ ।
(५१) कला के यहाँ दो अर्थ हैं—प्रथम तो ज्ञान और अन्य "चंद्रमा के अंक" ।