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श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

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पृष्ठ 656

प्र० ति० 20-12-2020
रजि० समाचारपत्र—रजि०नं० 2308/57 पंजीकृत संख्या—NP/GR-13/2020-2022
LICENSED TO POST WITHOUT PRE-PAYMENT LICENCE No. WPP/GR-03/2020-2022

श्रीगणेशनीराजनम्

जय देव जय देव गजमुख सुखहेतो।
नेतर्विघ्नगणानां जाड्यार्णवसेतो ॥ ध्रुवपदम् ॥
येन भवदुपायनतां नीता नवदूर्वा।
विद्यासम्पत्कीर्तिस्तेनाप्तापूर्वा ।
मुक्तिर्लभ्या सुखतस्तव नित्यापूर्वा।
धार्या जगतः स्थितये भूमौ दिवि धू... ॥ जय० ॥ १ ॥
प्रथमनमस्कृतिभाक्त्वं तव लोकप्रथितम्।
दृष्टं सद्व्यवहारे गुरुभिरपि च कथितम्।
यः कश्चन विमुखस्त्वयि निजसिद्धेः पथि सङ्गी
विविधा विघ्ना भगवन् कुर्वन्ति व्यथितम् ॥ जय० ॥ २ ॥
बालं सकृदनुसरति त्वद्दृष्टिश्चेत्ता।
मनुराशीनिव दासीर्विद्याः स हि वेत्ता।
पविपाणिरिव परं परपक्षाणां भेत्ता।
भवति मयूरोऽहेरिव मोहस्यच्छेत्ता ॥ जय० ॥ ३ ॥
॥ इति कविवरमोरोपन्तकृतं श्रीगणेशनीराजनं सम्पूर्णम् ॥

भगवान् श्रीगणेशजीकी आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
एकदन्त दयावन्त चार भुजा धारी।
मस्तक सिन्दूर सोहे मूसे की सवारी ॥
अन्धन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया ॥
लड्डुवन का भोग लगे सन्त करे सेवा।
हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ॥
दीनन की लाज राख शम्भु-सुत वारी।
कामना को पूरा करो जग बलिहारी ॥